अयोध्या: हरा चारा तो दूर बेजुबानों को पानी भी नहीं है मयस्सर, गोवंश संरक्षण के दावे दिखे बेमानी
अयोध्या। सूबे की सरकार गोवंश संरक्षण के तमाम दावे करे, लेकिन हकीकत बेहद भयावह है। गो-आश्रय केंद्रों पर पशुओं के चारे की बात तो दरकिनार पानी तक के इंतजाम नहीं हैं। यह हाल तब है जब गोवंश संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद गंभीर हैं। गायों के प्रति उनका प्रेम सर्वविदित है। इसके बाद …
अयोध्या। सूबे की सरकार गोवंश संरक्षण के तमाम दावे करे, लेकिन हकीकत बेहद भयावह है। गो-आश्रय केंद्रों पर पशुओं के चारे की बात तो दरकिनार पानी तक के इंतजाम नहीं हैं। यह हाल तब है जब गोवंश संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद गंभीर हैं। गायों के प्रति उनका प्रेम सर्वविदित है। इसके बाद भी गो-आश्रय केंद्र बदहाल हैं।
रविवार को यह तल्ख हकीकत तब सामने आई जब क्षेत्र के परसावां में गो-आश्रय केंद्र का जायजा लिया गया। यहां धरातल पर जिम्मेदार सरकार के दावों को कायदे से पलीता लगा रहे हैं। यहां गौशाला में पर्याप्त मात्रा में हरे चारे की व्यवस्था नहीं है और न ही भूसे की ही व्यवस्था है। ऐसे में गोवंश भूख से तड़पने को विवश है। परसवां गो – आश्रय केंद्र में लगभग 150 गोवंश हैं, जिनके खाने के लिए मात्र 2 कुंटल भूसा व 2 बोरी चूनी चोकर रखा हुआ मिला। यहां एक ठेले पर लगभग डेढ़ सौ मवेशियों को खिलाने के लिए चरी मंगाई गई थी, जिसे बिना कटाई के ही खुले आसमान में फेंक दिया गया। थोड़े से हरे चारे के लिए छोटे बड़े सभी गोवंश अपना पेट भरने के लिए संघर्ष करते दिखे।
केंद्र के केयर टेकर का तर्क
पशुओं की देखरेख के लिए लगे केयरटेकर काली प्रसाद, रामअधार, खुशीराम ने बताया कि यदि हम चारा कटाई करके देते हैं तो सभी पशुओं के पास नहीं पहुंच पाएगा, लेकिन जब हम इसे खड़े ही जमीन पर बिखरा देंगे तो थोड़ा-थोड़ा सभी को मिल जाता है। वही लगभग 8 से 10 की संख्या में गाय के छोटे-छोटे बछड़े हैं जिनके लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं दिखाई दी। हरा चारा भी उनके पहुंच से दूर है। केंद्र पर मौजूद केयरटेकर से जब पशुओं की उपस्थिति पंजिका के बारे में जानकारी चाही गई तो उन्होंने कहा कि पशुओं का कोई रजिस्टर नहीं है।
बीडीओ व केयरटेकर की अलग-अलग बातें
इस संबंध में जब खंड विकास अधिकारी मिल्कीपुर मनीष मौर्या से जानकारी चाही गई तो उन्होंने कहा कि रविवार सुबह 10 बजे स्वयं मौके पर गया था। भूसा नहीं है, मंगवाया गया है। शाम तक आ जाएगा। उन्होंने दावा किया कि कि हरा चारा पशुओं को दिया जा रहा है। बोले उनके सामने ही तीन ठेला हरा चारा पशुओं के लिए आया था, जबकि वहां पर मौजूद केयरटेकरों का कहना है कि एक ठेला दोपहर का व एक ठेला शाम हरा चारा खड़ा ही दिया जाता है। अब केयर टेकर और बीडीओ जाने सही कौन कह रहा है।
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