लखनऊ: केजीएमयू में नहीं मिल रहीं जीवन रक्षक दवाएं, मरीज परेशान
लखनऊ। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देशों के बाद भी अस्पतालों में मरीजों से जुड़ी सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ताजा मामला केजीएमयू में प्रकाश में आया है। यहां मरीजों को दवाओं के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। अमृत फार्मेसी में जीवन रक्षक दवाएं नहीं मिल रही हैं। एचआरएफ और …
लखनऊ। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देशों के बाद भी अस्पतालों में मरीजों से जुड़ी सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ताजा मामला केजीएमयू में प्रकाश में आया है। यहां मरीजों को दवाओं के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। अमृत फार्मेसी में जीवन रक्षक दवाएं नहीं मिल रही हैं। एचआरएफ और जन औषधि केंद्रों पर भी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में बनी अमृत फॉर्मेसी मरीजों को सस्ती दवा देने के लिए बनाई गई थी लेकिन, वहां मरीजों को दवाइयां नहीं मिल रही हैं। दूसरे राज्यों से आए हुए मरीज यहां दवा के लिए दर-दर भटक रहे हैं। बेहटा निवासी सलमा दिमाग में दिक्कत होने पर केजीएमयू में न्यूरो के डॉक्टर को दिखाने पहुंची।
उनका कहना है कि डॉक्टर ने जो दवा लिखी थी वो अमृत फॉर्मेसी में नहीं मिली, न ही एचआरएफ में मिली। स्टोर वालों का कहना है कि ये दवा यहां नहीं मिलती, बाहर ही लेनी पड़ेगी। बाहर से 10 दिन की दवा एक हजार की मिलती है, मेरे पति को शराब की लत है पैसा नहीं देते हैं। मैं खुद ही काम-काज करके अपना इलाज करा रही हूं। ऐसे में दवाओं पर कुछ छूट मिल जाती तो राहत होती।
अलीगंज निवासी रहमत अली ने बताया कि काफी दिनों से खांसी आ रही थी, जिसका इलाज कराने रेस्पीरेटरी विभाग में गए थे। डॉक्टर ने 10 दिन की दवा लिखी, लेकिन अस्पताल में कहीं भी वह दवाइयां नहीं मिलीं। दो दिन तक इधर-उधर भटकने के बाद बाहर के स्टोर से दवा लेनी पड़ी, जो बहुत ज्यादा महंगी है। रहमत ई-रिक्शा चलाकर अपना परिवार पालता हैं।
ऐसे में महंगी दवाइयों का बोझ उस पर भारी पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि अमृत फॉर्मेसी और एचआरएफ के अलावा जो सरकारी जन औषधि केंद्र बनाए गए हैं, वहां भी दवाइयां नहीं मिलतीं। मरीजों को दवा के लिए बाहर के स्टोर का रुख करना पड़ रहा है, जो उनके बजट को बिगाड़ रहा है।
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