बहराइच: आगा खान, बर्नार्ड वैन संस्थाओं में शिशु देखभाल और विकास प्रशिक्षण का हुआ अयोजन

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बहराइच। आगा खान फाउंडेशन एवं बर्नार्ड वैन लीर फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से संचालित पैरेंट कोचिंग इन 1000 डेज कार्यक्रम के अंतर्गत शिशु की उत्तरदायी देखभाल और शिशु विकास के पड़ाव विषयक प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन आगा खान फाउंडेशन के कार्यालय में आयोजित हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए अ़पर मुख्य चिकित्सा …

बहराइच। आगा खान फाउंडेशन एवं बर्नार्ड वैन लीर फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से संचालित पैरेंट कोचिंग इन 1000 डेज कार्यक्रम के अंतर्गत शिशु की उत्तरदायी देखभाल और शिशु विकास के पड़ाव विषयक प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन आगा खान फाउंडेशन के कार्यालय में आयोजित हुआ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए अ़पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर राजेश कुमार ने कहा कि हर एक बच्चे को जीवन में अच्छी शुरुआत मिले जिससे कि वह स्वस्थ, रचनात्मक और शांतिप्रिय समुदाय के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सके, उन्होंने बताया की शुरुआत के दो वर्षों में ही बच्चों के दिमाग का लगभग 80 फ़ीसदी विकास हो चुका होता है।

इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इस उम्र में बच्चे के स्वास्थ्य, पोषण और उत्तरदायी देखभाल पर विशेष बल दिया जाए, जिससे शिशु का समुचित विकास हो सके, जिससे बेहतर भविष्य के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सके। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि शुरुआती 1000 दिन मां और बच्चे दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, इन महत्वपूर्ण दिनों में समुचित देखभाल कर मातृ और शिशु मृत्यु दर दोनों को कम किया जा सकता है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ योगिता जैन ने कहा कि शुरुआती उम्र में बच्चे को जैसा वातावरण और अनुभव मिलते है वैसा ही उसके भविष्य का निर्माण होता है। यदि बच्चे को प्यार दुलार और अपनों का साथ मिला है तो वह सुरक्षा का अनुभव करेगा और समाज को भी उसी नजरिये से देखेगा परन्तु यदि उसने गुस्सा, झगड़ा और दुत्कार देखा है या महसूस किया है तो बड़ा होकर समाज को उसी नजरिये से देखेगा।

यदि शुरुआती उम्र में बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य और पोषण मिलेगा तो वह सवस्थ रहेगा लंबी उम्र जिएगा एक अच्छा भाई, एक अच्छा बेटा, एक अच्छा सहकर्मी और एक अच्छा नागरिक बनेगा। प्रशिक्षण के दौरान शिशु के विकास के महत्वपूर्ण पड़ावो पर चर्चा करते हुए बताया कि दो से तीन माह का होने के बाद बच्चा अपनी माँ को देखकर मुस्कुराने लगता है।

आंख से आंख मिलाने लगता है एवं अपने पहचान के लोगों को देख के भी मुस्कुराने लगता है। 4 से 6 माह होने के बाद बच्चा अपने आसपास मौजूद खिलौनों को देखकर उनकी तरफ हाथ बढ़ाने लगता है, जब उसके ऊपर खिलौने लटका है तो और हाथ उसे छूने की कोशीश करता है और जब उसको अपने आस पास कोई आवाज सुनाई देती है तो उसकी तरफ अपना सिर मोड़ के देखने लगता है।

सात से 24 माह में बच्चा घुटनों के बल चलने लगता है और उसके पश्चात बिना सहायता के बैठना और गोद में जानने के लिए अपना हाथ बढ़ाने की शुरुआत करने लगता है जब बच्चे 18 माह के होते हैं तो खुद से कुछ कदम खड़े होकर चलने भी लगते है, चित्रों में वस्तुओं को देख कर उनको पहचानने भी लगता है।

कार्यक्रम के दौरान अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर अनिल, डीपीएम सरजू खान, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम से राकेश गुप्ता, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से गोविन्द रावत ने प्रतिभागियों के साथ चर्चा की। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तेजवापुर और फखरपुर के आशा संगिनी मौजूद रहे।

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