बाराबंकी: महिलाओं ने रखा वट सावित्री का व्रत, बरगद और पीपल की फेरी लगाकर की पूजा-अर्चना

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बाराबंकी। जेष्ठ माह की कृष्ण अमावस्या (बरगदही अमावस्या) और सोमवती अमावस्या के अद्भुत संयोग पर जिले में जगह-जगह बड़ी संख्या में महिलाओं ने बरगद और पीपल की फेरी लगाकर पूजा अर्चना की। सुखद वैवाहिक जीवन और पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रविवार को वट सावित्री व्रत रखकर वट वृक्ष व सोमवारी अमावस्या का …

बाराबंकी। जेष्ठ माह की कृष्ण अमावस्या (बरगदही अमावस्या) और सोमवती अमावस्या के अद्भुत संयोग पर जिले में जगह-जगह बड़ी संख्या में महिलाओं ने बरगद और पीपल की फेरी लगाकर पूजा अर्चना की।

सुखद वैवाहिक जीवन और पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रविवार को वट सावित्री व्रत रखकर वट वृक्ष व सोमवारी अमावस्या का व्रत रख बरगद वृक्ष की विधिवत पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

कोरोनावायरस के चलते पिछले 2 वर्षों से महिलाएं घरों में ही इस पूजा को करती थी। लेकिन इस बार महिलाओं में इस त्यौहार को लेकर खासा उत्साह दिख रहा है। महिलाओं ने पूजा में सर्वप्रथम जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भीगा चना, फूल व धूप चढ़ाया। किसी ने वटवृक्ष के तने पर 7 से 13 फेरी और पीपल वृक्ष के तने पर 113 बार कच्चे सूत से परिक्रमा कर पूजा का फल प्राप्त किया।

बरगद और पीपल के नीचे पूजा का विधान

सनातन धर्म को मानने वाली महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पति पर आए संकट दूर हो जाते हैं। और वह दीर्घायु प्राप्त करता है।

दांपत्य जीवन में आने वाले नाना प्रकार के कष्ट भी इस व्रत को रखने से दूर हो जाते हैं। इस व्रत को रखने वाली सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष 7 से 13 परिक्रमा और पीपल की 113 फेरी लगाकर विधिवत पूजा-अर्चना करती हैं।

किशोरियां भी करती हैं पूजा

अविवाहित युवतियां भी अपने भावी जीवन को सुखद बनाने के लिए इसकी पूजा-अर्चना करती हैं। ऐसी मान्यता है कि वट सावित्री व्रत व सोमवती अमावस्या का व्रत रखने वाली युवतियों को उनके मनवांछित वर व सफल वैवाहिक जीवन की कामना पूरी होती है।

जिन युवतियों का विवाह किन्ही कारणों से रुक जाता है। इस व्रत रखने से उनके विवाह में आने वाली प्रत्येक रुकावट को दूर कर मनवांछित वर प्रदान करता है।

सावित्री-सत्यवान की कथा का विशेष महत्व

ज्योतिषाचार्य पंडित विमल बताते हैं कि इस दिन सावित्री और सत्यवान की कथा सुनने का विशेष महत्व है। श्रद्धा पूर्वक कथा सुनने वाले लोगों के मनवांछित फलों की पूर्ति भगवान हरि स्वयं करते हैं।

सती सावित्री देवी ने इसी दिन यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थी। इस बार आज के दिन  नक्षत्रों का अच्छा संयोग बना है।जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने सुबह 7:12 बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग में वटवृक्ष  की फेरी लगाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

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