बाराबंकी: विवाद के बाद छोटी हनुमानगढ़ी पर प्रारंभ हुई श्री राम कथा, मंगलवार को होगा सामूहिक विवाह और भंडारा

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बाराबंकी। सोमवार शाम रामसनेही घाट स्थित छोटी हनुमानगढ़ी पर श्री राम कथा प्रारंभ हुई। इसके साथ ही श्री राम कथा को लेकर पिछले 4 दिन से चल रहे विवाद का पटाक्षेप हो गया। मंगलवार को भंडारे के साथ-साथ 33 जोड़े पढ़ने सूत्र में बधेंगे।श्रीराम कथा का श्रीगणेश करते हुए मानस मर्मज्ञ मोहित शास्त्री ने कहां …

बाराबंकी। सोमवार शाम रामसनेही घाट स्थित छोटी हनुमानगढ़ी पर श्री राम कथा प्रारंभ हुई। इसके साथ ही श्री राम कथा को लेकर पिछले 4 दिन से चल रहे विवाद का पटाक्षेप हो गया। मंगलवार को भंडारे के साथ-साथ 33 जोड़े पढ़ने सूत्र में बधेंगे।श्रीराम कथा का श्रीगणेश करते हुए मानस मर्मज्ञ मोहित शास्त्री ने कहां कि गोस्वामी तुलसीदास राम चरित्र मानस मैं लिख रहे है कि बिनु सत्संग विवेक न होई। रामकृपा बिनु सुलभ न सोई।

सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और भगवान की कृपा के बिना सच्चे संत नहीं मिलते। तोते की तरह रट-रटकर बोलने वाले तो बहुत मिलते हैं, परंतु उस ‘सत्’ तत्त्व का अनुभव करने वाले महापुरूष विरले ही मिलते हैं। आत्मज्ञान को पाने के लिए रामकृपा, सत्संग और सदगुरू की कृपा आवश्यक है। ये तीनों मिल जायें तो हो गया बेड़ा पार।निष्काम कर्म और उपासना से अंतःकरण शुद्ध होता है और रामकृपा मिलती है।

सदगुरू के उपदेश को जीवन में उतारने से उनकी कृपा पचती है। संत-महात्माओं की बिना किसी स्वार्थ के, सच्चे प्रेम से सेवा करनी चाहिए। यदि वे स्वयं प्रसन्न होकर कहें कि कुछ माँगो, तो भी यही मांगना कि ‘मुझे वही शाश्वत धन दीजिए जो आपने पाया है। मुझे अपने साथ मिला दीजिए।’ भोलेनाथ ने देखा कि उनके आराध्यदेव भगवान राम माता सीता के वियोग में भटक रहे हैं। उन्हें देखने के बाद शिव ने उन्हें प्रणाम किया, मगर माता पार्वती के मन में राम की परीक्षा लेने का विचार आया।

भोलेनाथ से आग्रह कर वे प्रभु राम की परीक्षा लेने पहुंचीं। लेकिन पार्वती को देखते ही भगवान राम ने पार्वती को माता का संबोधन देते हुए कहा कि आप यहां, भोलेनाथ कहां हैं माता पार्वती मजाक के मूड में ही थीं। भगवान द्वारा पहचाने जाने और माता शब्द के संबोधन को छिपाते हुए पार्वती ने शिव से झूठ का सहारा लिया। उन्होंने शिव जी से कहा कि भगवान राम ने नहीं पहचाना। भगवान शिव तो अंतर्यामी हैं उन्हें पता चल गया कि राम ने उन्हें माता के नाम से संबोधित किया है तो उन्होंने माता पार्वती का त्याग कर दिया। माता पार्वती के त्याग का एक कारण यह भी रहा कि भगवान राम विष्णु के अवतार हैं। और उन्होंने पार्वती जी को माता कहा था।

संसार की नश्वर चीजों की इच्छा रखोगे तो सदा दुःखी रहना पड़ेगा, अत्यधिक दुःख भोगना पड़ेगा। इच्छा करनी है तो आत्मस्वभाव को जानने की, भगवान से एक होने की करो। इच्छा करो, प्रबल इच्छा करो लेकिन संसार को पाने की नहीं अपितु सच्चा आनंद पाने की, मुक्ति पाने की….। उद्यम करो, खूब उद्यम करो अपने असली घर में पहुँचने के लिए जहां पहुंचने के बाद फिर इस दुःखरूप संसार में वापस नहीं आना पड़ता। इस मौके पर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष कमलेश वर्मा, ब्लाक प्रमुख चन्द्र शेखर वर्मा, भैरव महाराज, मुरारी यादव, अजय तिवारी, नीरज शुक्ला,किसान नेताराम सुरेश तिवारी सहित आदि लोग मौजूद थे।

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