सावधान: Monkeypox से बच्चों को ज्यादा खतरा, लक्षणों पर रखनी होगी कड़ी नजर

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लखनऊ। कई देशों में दहशत फैला रहे मंकीपॉक्स वायरस को लेकर राजधानी में भी अलर्ट जारी किया गया है। चिकित्सा संस्थान संजय गांधी स्नात्कोत्तर आयुर्विज्ञान (एसजीपीजीआई) की वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पियाली भट्टाचार्या ने बताया कि करीब 19 देशों से आ रही जानकारी के अनुसार मंकीपॉक्स एक वायरल बीमारी है जो तेजी से इंसानों …

लखनऊ। कई देशों में दहशत फैला रहे मंकीपॉक्स वायरस को लेकर राजधानी में भी अलर्ट जारी किया गया है। चिकित्सा संस्थान संजय गांधी स्नात्कोत्तर आयुर्विज्ञान (एसजीपीजीआई) की वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पियाली भट्टाचार्या ने बताया कि करीब 19 देशों से आ रही जानकारी के अनुसार मंकीपॉक्स एक वायरल बीमारी है जो तेजी से इंसानों में फैल रही है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ)की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार छह मई से शुरु होकर अब तक यह 19 देशों को अपनी चपेट में ले चुका है।
छोटे बच्चों के लिए ज्यादा खतरा

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भट्टाचार्या ने बताया कि इस बीमारी में यह पाया गया है कि बच्चों में यह वायरस तेजी से असर करता है, और घातक भी है। इससे उन बच्चों को ज्यादा खतरा होगा जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होगी या जो बच्चे कुपोषित होंगे उन पर इसके गंभीर परिणाम नजर आ सकते हैं। इसे लेकर लापरवाही करना बच्चों पर भारी पड़ सकता है।

मंकीपॉक्स के लक्षण

डॉ. भट्टाचार्य ने बताया कि इस बीमारी में मरीज को बुखार, मांसपेशियों में तेज दर्द, गिल्टियों का होना और त्वचा पर छाले पड़ने या रैसेज जैसी स्थिति हो जाती है। राहत की बात यह है कि अब तक यह बीमारी उत्तर प्रदेश तक नहीं पहुंची है।

स्मालपॉक्स की ले सकते हैं वैक्सीन: डॉ. पियाली

डाक्टर भट्टाचार्य बताती हैं कि मंकीपॉक्स की अलग से कोई वैक्सीन नहीं बनी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि स्माल पॉक्स की वैक्सीन इसमें 90 फीसदी तक काम करती है। बताया कि स्माल पॉक्स के दुनिया से समाप्त होने के बाद अमेरिका में स्माल पॉक्स की वैक्सीन बचाकर रखी गई थी। ऐसा माना जा रहा है कि मंकीपॉक्स के दौर में उसका उपयोग फिर से किया जा सकता है।

बच्चों के वार्ड किए तैयार

मंकीपॉक्स को लेकर राजधानी के सभी अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग ने सतर्क कर दिया है। वहीं बच्चों के लिए अलग से व्यवस्था की गई हैं। लोकबंधु अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया कि सभी तैयारियां पूरी हैं, आइसोलेशन वार्ड में चार बेड आरक्षित कर लिए गए हैं। लोहिया अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजन भटनागर ने बताया कि पिडियाट्रिक वार्ड में ही बेड आरक्षित कर लिए गए हैं। यदि कोई मंकीपॉक्स का मरीज आता है तो उसे आइसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा।

सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरपी सिंह के अनुसार चार बेड का आइसोलेशन वार्ड बच्चों के लिए पीडियाट्रिक विभाग में ही बनाया गया है। केजीएमयू के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएन शंखवार ने बताया कि बच्चों को मंकीपॉक्स से बचाने के लिए अस्पताल के पीडीयाट्रिक वार्ड में ही बेड आरक्षित किए गए हैं। डॉ. एसएन शंखवार ने बताया कि सबसे पहले लोगों को मंकीपॉक्स से जागरूक करना आवश्यक है। विदेश से आने वाले व्यक्तियों पर खास नजर रखी जाए। लक्षण पाये जाने पर तुरंत उसे आइसोलेट किया जाए।

इन देशों में मिला मंकी पॉक्स

वर्तमान में मंकी पॉक्स के मामले यूरोप के देशों में ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। जर्मनी, पुर्तगाल, स्पेन, इटली, स्वीडनए फ्रांस और बेल्जियम में इस के मरीज मिले चुके है। इसके अलावा इंग्लैण्ड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में भी इससे संक्रमित केस आ चुके है।

मंकी पॉक्स का भारत में अभी कोई मरीज नहीं मिला है। एहतियातन सतर्कता जरूरी है इसलिये सभी अस्पतालों को तैयार रहने के आदेश-निर्देश जारी कर दिये गये हैं…सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल।

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