बरेली: शहर से सभी डलावघर खत्म करेगा नगर निगम, बन गए काम्पेक्टर, दुर्गंध हो गई दूर
अमृत विचार, बरेली। शहर जगह -जगह बने डलावघरों में एकत्र कूड़े की वजह से साफ नजर नहीं आता था। शहर को स्वच्छ बनाने के लिए नगर आयुक्त की पहल रंग लाई और अब डलावघर कम हुए तो गंदगी भी कम दिखाई दे रही है। साथ ही डीजल का खर्च भी कम हो गया है। यह …
अमृत विचार, बरेली। शहर जगह -जगह बने डलावघरों में एकत्र कूड़े की वजह से साफ नजर नहीं आता था। शहर को स्वच्छ बनाने के लिए नगर आयुक्त की पहल रंग लाई और अब डलावघर कम हुए तो गंदगी भी कम दिखाई दे रही है। साथ ही डीजल का खर्च भी कम हो गया है। यह काम हुआ डलाव घर की जगह कांपेक्शन यूनिट लगने से। इस यूनिट में पांच ट्र्रैक्टर-ट्राॅलियों का कूड़ा एक कैप्सूल में बदलकर खाद बनाने को बाकरगंज भेजा जा रहा है।
कुछ समय पहले तक डेलापीर तालाब के डलावघर में आधे शहर का कूड़ा आता था। जानवर इसे सड़क पर फैलाते थे। इससे दुर्गंध उठती थी। उसके बाद यही कूड़ा बाकरगंज जाता था। इस तरह यह क्षेत्र गंदगी वाला नजर आता था। अब डेलापीर के डलावघर में कूड़ा फैला नजर नहीं आता। यह बदलाव हुआ है पर्यावरण के प्रति चिंता करने से। यह चिंता नगर आयुक्त अभिषेक आनंद ने की। उन्होंने सालिड वेस्ट मैनेजमेंट विशेषज्ञ आशीष चौहान को चिंता जताई और प्रोजेक्ट बनाने को कहा।
आशीष ने शहर के 80 वार्ड में स्थित 84 डलावघरों की मैपिंग की। इस दौरान दो वार्ड में एक डलावघर को रखा। इसके बाद चार वार्ड में दो डलावघरों को रखने की योजना बनी। इस तरह शहर में 23 डलाव घर रह गए। इन खुले डलावघरों में शेड डालकर दीवार बनाई गई और इसे ट्रांसफर स्टेशन के रूप में विकसित किया। इनमें कांपेक्शन यूनिट लगाई गई।
जमीन पर नहीं पड़ता कूड़ा
पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान ने बताया कि अब कूड़ा जमीन पर नहीं पड़ता है। कूड़े को कांपेक्शन मशीन में डालते हैं और उसमें लगी हाइड्रोलिक मशीन दो ट्रॉली कूड़े को दबाकर एक कैप्सूल में बदल देती है। डेलापीर जैसी एक यूनिट में पांच ट्रॉली कूड़ा आ जाता है। इससे बने कैप्सूल को खाद बनाने के लिए फिलहाल बाकरगंज भेजा जा रहा है। इससे दो लाभ होते हैं। पहला जगह कम घिरती है और दूसरा कूड़ा फैला नहीं दिखाई देता। कूड़े में 70 फीसदी नमी कम हो जाती। डेलापीर डलाव घर से ही कई ट्रक कूड़ा बाकरगंज जाता था। अब कैप्सूल के रूप में एकत्र ज्यादा कूड़ा एक वाहन से आसानी से चला जाता है। इससे कई वाहनों के डीजल की बचत हो रही।
अभिषेक आनंद, नगर आयुक्त-
शहर में 84 डलाव घर थे। इन्हें कम किया गया है। अब 23 रह गए हैं। सीआई पार्क का ट्रांसफर स्टेशन चालू हो गया। स्वालेनगर, आजमनगर काम्पेक्टर बन गया है। डेलापीर में जहां सड़क पर कूड़ा नजर आता था। अब वह साफ दिखाई पड़ती है। पूरा इलाका दुर्गंध मुक्त हो गया है।
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