लखनऊ: विश्व संवाद केंद्र में हुआ ‘देश-परदेश’ पुस्तक का विमोचन
लखनऊ। राजधानी के जियामऊ स्थित विश्व संवाद केन्द्र के अधीश सभागार में देश-परदेश पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक वरिष्ठ साहित्यकार श्रीधर पराड़कर द्वारा सृजित कृति है। इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद के लखनऊ महानगर अध्यक्ष निर्भय नारायण गुप्ता ने कहा कि साहित्यकार के लिए भ्रमण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि साहित्यकार …
लखनऊ। राजधानी के जियामऊ स्थित विश्व संवाद केन्द्र के अधीश सभागार में देश-परदेश पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक वरिष्ठ साहित्यकार श्रीधर पराड़कर द्वारा सृजित कृति है। इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद के लखनऊ महानगर अध्यक्ष निर्भय नारायण गुप्ता ने कहा कि साहित्यकार के लिए भ्रमण आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि साहित्यकार अपने लिए नहीं समाज के लिए लिखता है। इस पुस्तक को पढ़कर ही देश परदेश का कोई भी शख्स भ्रमण कर सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए भी विभिन्न जगहों के यात्रा का उल्लेख इस पुस्तक में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि एक ही चीज को व्यक्ति अलग-अलग भाव से देखता है।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर ने कहा कि कहीं पर किसी चीज को अगर आप पर्यटक की दृष्टि से देखेंगे तो आपको भौतिक सम्पदा दिखेगी और अगर आप साहित्यकार की दृष्टि से देखेंगे तो आपको बहुत सारी चीजें मिल जायेंगी। उन्होंने कहा कि मनुष्य की यात्रा सतत चलती रहती है। एक अन्तर यात्रा और एक वाह्य यात्रा। इसलिए अन्तर यात्रा का प्रकटीकरण होना चाहिए।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री ने कहा कि हमें ऐसा लेखन करना होगा कि पाठक पढ़ने के लिए बाध्य हो।अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संयुक्त महामंत्री डा. पवन पुत्र बादल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि साहित्य परिषद भारतीय मनीषा को लेकर कार्य करती है। इसलिए साहित्य परिषद के लोगों ने विचार किया कि अगर हमें भारत के अंदर और भारत के बाहर का संदर्भ लेना होगा तो वहां जाकर हमें देखना पड़ेगा कि विदेशों में भारत का क्या है।
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