मुरादाबाद : बेहतर परीक्षा परिणाम नहीं देने पर होगी सख्ती
मुरादाबाद, अमृत विचार। यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम आने के साथ ही कॉलेजों की समीक्षा शुरू हो गई है। कॉलेजों के विद्यार्थियों के उत्तीर्णता प्रतिशत के आधार पर शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन हो रहा है। अब अगले साल के बोर्ड परीक्षा परिणाम में इन्हें बेहतर प्रदर्शन करने के लिए निर्देशित किया गया है। जो …
मुरादाबाद, अमृत विचार। यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम आने के साथ ही कॉलेजों की समीक्षा शुरू हो गई है। कॉलेजों के विद्यार्थियों के उत्तीर्णता प्रतिशत के आधार पर शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन हो रहा है। अब अगले साल के बोर्ड परीक्षा परिणाम में इन्हें बेहतर प्रदर्शन करने के लिए निर्देशित किया गया है। जो कॉलेज बेहतर परिणाम नहीं दे सकेंगे, उन पर सख्ती बरती जाएगी।
दरअसल, इस साल वित्त विहीन विद्यालयों का रिजल्ट बेहतर रहा है। प्रदेश के टॉप-10 टॉपरों में इनके विद्यार्थियों का दबदबा रहा। जबकि तमाम सुविधाओं वाले राजकीय इंटर कॉलेजों के विद्यार्थियों का रिजल्ट उम्मीद से काफी कम रहा। जिले में यूपी बोर्ड के 432 कॉलेज हैं। इनमें 33 राजकीय इंटर कॉलेज, 54 अशासकीय सहायता प्राप्त व 345 वित्त विहीन विद्यालय हैं। राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों के वेतन व सुविधाओं के मुकाबले वित्त विहीन विद्यालयों में शिक्षकों को न तो सुविधा है, न सरकार से कोई विशेष मदद। फिर भी इन कॉलेजों के छात्र-छात्राओं का परिणाम सरकारी के मुकाबले में इस बार भी बेहतर रहा।
हाईस्कूल के परीक्षा परिणाम में जहां राजकीय में दो कॉलेजों का परिणाम शत प्रतिशत रहा। वहीं, 43 वित्त विहीन कॉलेजों में 100 प्रतिशत अंक पाकर विद्यार्थियों ने साबित कर दिया कि उनके यहां सुविधाएं भले कम हैं, लेकिन पढ़ने की ललक व शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन से उनका परिणाम बेहतर रहा। वित्त विहीन स्कूलों में 90-99 प्रतिशत परिणाम जहां 134 कॉलेजों में आया, वहीं राजकीय में महज 12 कॉलेज में ऐसा रहा। यही स्थिति कमोबेश इंटर के परीक्षा परिणाम में भी रहा।
इस बार यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं के परिणाम और उत्तीर्ण प्रतिशत के आधार पर कॉलेजों की समीक्षा हो रही है। बेहतर न देने वाले कालेजों पर सख्ती की जाएगी। 2022-23 के सत्र का परिणाम और बेहतर लाना सभी का लक्ष्य होना चाहिए।- डॉ. अरुण कुमार दुबे, जिला विद्यालय निरीक्षक
जिले के टॉप-10 की स्थिति
जिले में यूपी बोर्ड की परीक्षा में हाईस्कूल में टॉप-10 में वित्त विहीन के 7 और प्रदेश की मेधा सूची में वित्त विहीन कॉलेज के एक छात्र शामिल हैं। इंटर में जिले की टॉप-10 में वित्त विहीन के तीन और प्रदेश की टॉप-10 में एक छात्र रहे। अन्य किसी वर्ग के कॉलेज के छात्र टॉप-10 में शामिल नहीं हैं।
