मुरादाबाद : शिशु-बाल मृत्यु दर का कारण है कुपोषण

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मुरादाबाद,अमृत विचार। जिले में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए अब संभव अभियान में पहल की गई है। इसमें तीन महीने तक अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाएगा। ऐसे बच्चों की देखभाल, कुपोषण से बचाव और प्रबंधन को लेकर प्रशिक्षण भी दिया गया है। संभव अभियान से आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेम-मेम कुपोषित …

मुरादाबाद,अमृत विचार। जिले में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए अब संभव अभियान में पहल की गई है। इसमें तीन महीने तक अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाएगा। ऐसे बच्चों की देखभाल, कुपोषण से बचाव और प्रबंधन को लेकर प्रशिक्षण भी दिया गया है।

संभव अभियान से आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेम-मेम कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें स्वस्थ करने के लिए यूनिसेफ के सहयोग से बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग मिलकर काम कर रहा है। एक जुलाई से शुरू हुए इस अभियान में बच्चों की देखभाल, कुपोषण से बचाव और प्रबंधन को लेकर प्रशिक्षित किया गया। मुख्य सेविका, सुपरवाइजर अब ऐसे बच्चों के इलाज और कुपोषण दूर करने के अन्य इंतजाम करेंगे।

जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास एवं पुष्टाहार डॉ. अनुपमा शांडिल्य ने बताया कि शिशु और बाल मृत्युदर का प्रमुख कारण कुपोषण है। कुपोषण की रोकथाम में सबसे बड़ी चुनौती समाज, परिवार और व्यक्ति के स्तर पर पोषण से संबंधित मौजूदा व्यवहारों, धारणाओं और मिथकों में परिवर्तन लाना है। आंगनबाड़ी सुपरवाइजर और कार्यकर्ता अति गंभीर कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केंद्र भेजेंगे।

यूनिसेफ के मंडलीय सलाहकार रवि प्रकाश श्रीवास्तव के अनुसार कुपोषित बच्चों की पहचान कर उनके चिकित्सीय प्रबंध की जानकारी देकर खान पान के बारे में भी बताया जा रहा है। कुपोषण की रोकथाम में सबसे बड़ी चुनौती समाज, परिवार और व्यक्ति के स्तर पर पोषण से संबंधित व्यवहार, धारणा, मिथक में परिवर्तन लाना है।

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