बाराबंकी: डिप्टी सीएम को निरीक्षण के दौरान सीएचसी में मिली गंदगी, सीएमओ को फोन पर लगाई फटकार, दिये ये निर्देश

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बाराबंकी। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैदरगढ़ का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें स्वास्थ्य केंद्र पर गंदगी अव्यवस्था एवं अनियमितता देखने को मिली। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी हो फोन कर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री तिलोई से राजा मयंकेश्वर शरण सिंह के भाई के निधन …

बाराबंकी। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैदरगढ़ का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें स्वास्थ्य केंद्र पर गंदगी अव्यवस्था एवं अनियमितता देखने को मिली। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी हो फोन कर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री तिलोई से राजा मयंकेश्वर शरण सिंह के भाई के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने के बाद वापस लौट रहे थे। शाम 4:00 बजे जैसे ही वह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में घुसे वहां हड़कंप मच गया।

स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक मौजूद नहीं थे इमरजेंसी मैं तैनात डॉक्टर सुनील से उन्होंने पूरी स्थिति की जानकारी ली। उन्हें पता चला कि इस दौरान डॉ. ओम प्रकाश पुरी और डॉक्टर तनुज अनुपस्थित थे। जिनका एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश उपमुख्यमंत्री ने सीएमओ को दिए हैं। उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओटी बंद मिली परिसर के अंदर गंदगी थी। चिकित्सक जेनेरिक दवाओं के स्थान पर बाहर से महंगी दवाएं लिख रहे थे।

उन्होंने इमरजेंसी पर तैनात चिकित्सक को सख्त हिदायत दी किसी भी दशा में केवल जेनेरिक दवाएं मरीजों को लिखी जाए। केवल जब जान बचाने का मामला हो उसी स्थिति में अन्य दवाएं लिखी जा सकती हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को फोन कर पूछा कि सीएचसी प्रभारी डॉक्टर मुकुंद पटेल कहां नदारद हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि डॉ पटेल बाराबंकी में एक मीटिंग में भाग लेने के लिए आए हुए हैं।

मरीजों के तीमारदारों ने यहां पानी उपलब्ध न होने की शिकायत की जिस पर उन्होंने खुद नल से पानी पीकर देखा तथा कहा कि पानी पीने योग्य है। औषधि कक्ष में घुसे उपमुख्यमंत्री को वहां अंधेरा मिला जिसके चलते उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ा। उन्होंने बाहर निकलने के बाद एंबुलेंस चालकों से भी बात की। चालकों से पूछा कि उन्हें क्या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी को पैसा देना पड़ता है। चालकों ने बताया कि पहले देना पड़ता था जब से उन लोगों ने धरना प्रदर्शन किया है तब से वसूली बंद है।

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