लखनऊ : विसंगतियों से भरी है स्थानांतरण की सूची, 300 डॉक्टरों की अपील को अनदेखा करने का लग रहा आरोप

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश में हुये डॉक्टरों के स्थानान्तरण पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने यूं ही सवाल नहीं उठाया, उनका एक-एक शब्द सच्चाई की परतें खोलता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में 2 हजार से अधिक डॉक्टरों का स्थानान्तरण हुआ, जिसमें शासन स्तर पर घोल लापरवाही की बात …

लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश में हुये डॉक्टरों के स्थानान्तरण पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने यूं ही सवाल नहीं उठाया, उनका एक-एक शब्द सच्चाई की परतें खोलता नजर आ रहा है।

बताया जा रहा है कि प्रदेश में 2 हजार से अधिक डॉक्टरों का स्थानान्तरण हुआ, जिसमें शासन स्तर पर घोल लापरवाही की बात सामने आ रही है। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि प्रदेश के उप मुख्यमंत्री तक ने इस मामले में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के अपर मुख्य सचिव से जवाब तक मांग लिया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब मांगे हैं। डिप्टी सीएम ने जो पत्र चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को लिखा है, उसमें उन्होंने कहा है कि वर्तमान सत्र में जो भी स्थानांतरण किए गए हैं, उनमें स्थानांतरण नीति का पालन पूरी तरीके से नहीं किया गया है। ऐसे में स्थानांतरण का कारण स्पष्ट करने तथा विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के अपर मुख्य सचिव को उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसी बीच प्रान्तीय चिकित्सा सेवा संघ यानी की पीएमएस ने ऐसे डॉक्टरों की जानकारी एकत्र करनी शुरू कर दी है, जिनके स्थानान्तरण में नियमों की अनदेखी की गयी है,साथ ही जिन्होंने स्थानान्तरण के लिए खुद अपील की थी। कहा जा रहा है कि प्रदेश में ऐसे चिकित्सकों की संख्या प्रदेश में 300 के करीब है। बताया जा रहा है कि इस बार स्थानान्तरण नीति का मजाक बनाया गया है, दाम्पत्य,विकलांगता,संघ पदाधिकारियों के स्थानान्तरण तक में नियमों की अनदेखी की गयी है।

प्रान्तीय चिकित्सा सेवा संघ के महासचिव डॉ.अमित ने बताया है कि प्रदेश के चिकित्सकों की सूची तैयारी की जा रही है,जल्द ही अधिकारियों से अपील की जायेगी कि स्थानान्तरण नीति का लाभ समस्याग्रस्त चिकित्सकों को मिल सके।

जिन चिकित्सकों की अपील को नजर अंदाज किया गया है आज उनकी बात

पहला मामला

डॉ.अशोक कुमार रोडियोलॉजिस्ट हैं, उनका परिवार हापुड़ में रहता है,वह दोनों पैरों से विकलांग हैं,वह अपना स्थानान्तरण हापुड़ में चाहते थे,बताया जा रहा है कि हापुड़ के जिला संयुक्त चिकित्सालय में कोई रेडियोलॉजिस्ट है भी नहीं, वहां के अस्पताल प्रशासन ने शासन से एक रेडियोलॉजिस्ट की मांग भी की थी,लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। जबकि 85 प्रतिशत विकलांगता की श्रेणी में आने वाले शख्स के लिए स्थानान्तरण नीति तय हैं।

दूसरा मामला

डॉ. नीलिमा का स्थानान्तरण बीते 30 जून को प्रयागराज से कानपुर देहात कर दिया गया। जबकि वह उच्च रक्त चाप की समस्या से जूझ रही हैं साथ ही वह एमजीयूएस बीमारी से जूझ रही हैं,जिसमें उनकों समय-समय पर कैंसर रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी पड़ती है। इतना ही नहीं उनकी बेटी को भी देखने वाला उनके सिवाय कोई नहीं है।

तीसरा मामला

बताया जा रहा है कि एक ऐसे चिकित्सक का तबादला कर दिया गया है,जो निलंबित चल रहे हैं,एक चिकित्सक 4 वर्ष से शासन द्वारा निलंबित चल रहे हैं तथा 31 मार्च 2022 तक मांगी गई सूचना में मुख्य चिकित्सा अधिकारी बुलंदशहर द्वारा लिखित में शासन को अवगत भी कराया गया था उसके बाद भी उनका स्थानांतरण जनपद बरेली में कर दिया गया है जो कि चिकित्सा अनुभाग की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

चौथा मामला

करीब चार साल से जेल में रहे डॉक्टर को अभी हालही में जमानत मिली है,उनका भी ट्रांसफर कर दिया गया है।

पांचवा मामला

डॉ.कुवर मनोज कुमार किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित है और मऊ जिले में बीते 16 सालों से तैनात हैं,उन्होंने अपना स्थानान्तण करने की गुजारिश की थी,बताया जा रहा है कि एक जिले में तीन साल व मण्डल में सात साल की तैनाती होने पर स्थानान्तण किया जा सकता है।

यह मामले तो बानगी मात्र हैं,बताया जा रहा है कि इस बार हुये स्थानान्तरण में दाम्पत्य नीति का भी पालन नहीं किया गया है। जिसमें प्रमुख रूप से डॉ रविंद्र कुमार ,डॉक्टर नरेंद्र कुमार समेत अन्य कई डॉक्टर शामिल हैं।

यह भी रहा आरोप

आरोप तो यहां तक लगाया जा रहा है कि एक ही मंडल में 19 से लेकर 25 वर्ष तक तैनात रहने के बाद भी कुछ चिकित्सकों का ट्रांसफर नहीं किया गया है।

यह भी पढ़ें –डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बहाने अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी पर कसा तंज, कहा- कोई पीछे से चला रहा है सरकार

संबंधित समाचार