72 साल से बरेली के लोगों की जुबां पर है तोलाराम की कुल्फी का स्वाद
बरेली, अमृत विचार। 72 साल से लोगों को अपने जायके की मुरीद करने वाली तोलाराम की कुल्फी आज भी लोगों की जुबां पर छाई हुई है। देर रात तक कुल्फी का जायका लेने वालों कि दुकान पर लाइन लगी रहती है। कई लोग लंबे समय से कुल्फी का जायका ले रहें हैं। अब तोलाराम की तीसरी पीढ़ी …
बरेली, अमृत विचार। 72 साल से लोगों को अपने जायके की मुरीद करने वाली तोलाराम की कुल्फी आज भी लोगों की जुबां पर छाई हुई है। देर रात तक कुल्फी का जायका लेने वालों कि दुकान पर लाइन लगी रहती है। कई लोग लंबे समय से कुल्फी का जायका ले रहें हैं। अब तोलाराम की तीसरी पीढ़ी उनका यह रोजगार संभाल रही है। उनकी कुल्फी का स्वाद इसलिए सभी से अलग है, आज तक उनकी कुल्फी में किसी प्रकार का कैमिकल या पाउडर नहीं पड़ा है। दूध, मेवा से बनी कुल्फी का जायका भी इसलिए सबसे अलग है।
तोलाराम की स्वादिष्ट कुल्फी बेचने वाले जवाहर पुत्र जीएल तनेजा ने बताया उनके दादा देश के विभाजन के समय पाकिस्तान से आए थे। किसी तरह परिवार को लेकर वह बरेली के माडल टॉउन में गुजारा बसर करने लगे। सब कुछ खोने के बाद परिवार के आगे रोजी -रोटी का संकट था। इसके बाद उनके दादा तोलाराम ने कोतवाली के पास कुतुबखाना रोड पर सन 1950 में छोटी सी दुकान खोलकर मिठाई, नमकीन के साथ ही गर्मी में कुल्फी का काम शुरू किया। उनकी बनाई कुल्फी का स्वाद लोगों को ऐसा भाया कि आज भी लोग उनकी दुकान पर जाना नहीं भूलते।
कैमिकल का नहीं करते प्रयोग
जवाहर ने बताया उनके यहां बनने वाली कुल्फी में किसी प्रकार का भी कैमिकल नहीं मिलाया जाता है। न ही वह किसी पाउडर का कुल्फी में उपयोग करते हैं। केवल पिस्ता, बादाम, काजू, आदि मेवा का कुल्फी में उपयोग किया जाता है। तोलाराम कुल्फी वालों की दुकान सुबह ग्यारह बजे खुल जाती है। कुल्फी खाने वालाें की लाइन देर रात एक बजे तक दुकान पर रहती है। वहां कुल्फी खाने आए युवकों का कहना था कि वह लंबे समय से तोलाराम की स्वादिष्ट कुल्फी का स्वाद ले रहे हैं।
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