‘ये गलियां, ये चौबारा, यहां आना है दोबारा…’ 75 साल बाद पाकिस्तान पहुंची भारतीय महिला, पुश्तैनी घर देख भर आईं आंखें

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लाहौर। 90 साल की भारतीय महिला रीना छिब्बर वर्मा 75 साल के इंतजार के बाद बुधवार को अपने पुश्तैनी घर ‘प्रेम निवास’ पहुंची तो ढोल बजाकर और फूलों की बारिश के साथ उनका स्वागत हुआ। रीना ने कहा, मेरा सपना आखिरकार सच हो गया। वह रावलपिंडी के अपने घर को देखकर यादों में खो गईं। …

लाहौर। 90 साल की भारतीय महिला रीना छिब्बर वर्मा 75 साल के इंतजार के बाद बुधवार को अपने पुश्तैनी घर ‘प्रेम निवास’ पहुंची तो ढोल बजाकर और फूलों की बारिश के साथ उनका स्वागत हुआ। रीना ने कहा, मेरा सपना आखिरकार सच हो गया। वह रावलपिंडी के अपने घर को देखकर यादों में खो गईं। उन्होंने घर के हर कमरे में जाकर उन दीवारों को निहारा, जो वे 75 साल पहले छोड़ गई थीं। पहली मंजिल की बालकनी में पहुंचकर रीना छिब्बर काफी भावुक हो गईं। अब उनके स्वागत का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

बचपन की यादें ताजा कर हो गईं भावुक

रीना के रावलपिंडी के इस पुश्तैनी घर ‘प्रेम निवास’ में अब उनके पुराने पड़ोसियों के पोते, पोतियां रहते हैं। इस घर को रिनोवेट किया गया है। लेकिन, दीवारों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई। रीना छिब्बर का कहना है कि मेरे पिता ने बहुत मेहनत से यह घर बनाया था। मुझे खुशी इस बात की है कि यह घर तकरीबन वैसे का वैसा ही है, जैसा पहले था। थोड़ा बहुत ही बदलाव हुआ है। यहां जो लोग रह रहे हैं, वे बहुत प्यारे लोग हैं।

रीना छिब्बर
रीना छिब्बर

भारतीय महिला ने गाया, ‘ये गलियां, ये चौबारा…’

इस दौरान उन्होंने अपने घर, गली, मोहल्ले को याद करते हुए गाया, ‘ये गलियां, ये चौबारा, यहां आना है दोबारा, अब हम तो हुए प्रदेशी…’ रीना उस दौर को याद कर कहती हैं, यहां का खाना और दोस्त अभी भी मेरे जेहन में हैं। यहां तक कि आज भी इन गलियों की खुशबू पुरानी यादें ताजा कर देती हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी यहां वापस आ सकूंगी। दोनों देशों की संस्कृति एक ही है। हम सभी एक-दूसरे से मिलना चाहते हैं।

‘मुझे पाकिस्तान बहुत प्यारा लगता है’

रीना ने कहा कि मुझे पाकिस्तान आकर ऐसा नहीं लगा कि मैं भारत से आई हूं। दोनों देशों के लोग एक दूसरे से मोहब्बत करते हैं और हमें एक रहना चाहिए। मुझे पाकिस्तान बहुत प्यारा लगता है और मैं बार-बार यहां आना चाहूंगी। वह बताती हैं कि उनकी उम्र के सभी लोग मर चुके हैं। खुद उनके माता-पिता और भाई, बहन का इंतकाल हो चुका है। बता दें कि महज 15 साल की रीना अपने परिवार के साथ मई से जुलाई 1947 में भारत पहुंची थीं। उस समय सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। पाकिस्तान के रावलपिंडी के अपने घर से 75 सालों से जुदा रही रीना कहती हैं, मैं अपने पुश्तैनी घर, मेरे पड़ोस और पिंडी की गलियों की यादें कभी नहीं मिटा पाई।

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