1971 में पाकिस्तानी सेना के साथ सहयोग करने पर छह रजाकारों को बांग्लादेश ने सुनाई मौत की सजा

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ढाका। अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में पाकिस्तानी सेना के साथ सहयोग करने वाले छह रजाकारों को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने गुरुवार को खुलना में यह फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति मोहम्मद शाहीनूर इस्लाम आईसीटी-1 के अध्यक्ष है, जबकि न्यायमूर्ति अबू अहमद जोमादार और न्यायमूर्ति के एम हाफिजुल आलम …

ढाका। अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में पाकिस्तानी सेना के साथ सहयोग करने वाले छह रजाकारों को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने गुरुवार को खुलना में यह फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति मोहम्मद शाहीनूर इस्लाम आईसीटी-1 के अध्यक्ष है, जबकि न्यायमूर्ति अबू अहमद जोमादार और न्यायमूर्ति के एम हाफिजुल आलम इसके अन्य सदस्य है।

अदालत ने जिन लोगों को मौत की सजा सुनायी उनके नाम अमजद हुसैन हाउलादर, मोहम्मद शहर अली सरदार, मोहम्मद अतियार रहमान शेख, मोहम्मद मोटासिन बिल्लाह, मोहम्मद कमाल उद्दीन गोल्डार और मोहम्मद नजरूल इस्लाम है। छह में से नजरूल को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है और उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया था। शुरुआत में सात आरोपी थे।

एक आरोपी मोहम्मद मोजहर अली शेख की मुकदमे के दौरान मौत हो गई। इस मामले में कुल 17 गवाहों की गवाही हुई। पाकिस्तानी सेना और उसके सशस्त्र सहयोगियों पर 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हजारों निर्दोष नागरिकों की हत्या करने का आरोप लगाया गया था, जिसके कारण तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान अलग हो गया और वह बंगलादेश नाम से एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया था।

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