मुरादाबाद : रामपुर एसपी की रिपोर्ट पर टिका 24 पुलिसकर्मियों का भविष्य, जानिए पूरा मामला
मुरादाबाद,अमृत विचार। मुठभेड़ के आरोप में घिरे रामपुर के पूर्व एसपी शगुन गौतम समेत 24 पुलिस कर्मियों का भविष्य रामपुर एसएसपी की जांच रिपोर्ट पर अटका है। अब रामपुर एसपी की रिपोर्ट ही पूरे मामले का पर्दाफाश करेगी। शासन के आदेश पर की गई डीआईजी की जांच में एसपी रामपुर शगुन गौतम और 23 पुलिस …
मुरादाबाद,अमृत विचार। मुठभेड़ के आरोप में घिरे रामपुर के पूर्व एसपी शगुन गौतम समेत 24 पुलिस कर्मियों का भविष्य रामपुर एसएसपी की जांच रिपोर्ट पर अटका है। अब रामपुर एसपी की रिपोर्ट ही पूरे मामले का पर्दाफाश करेगी। शासन के आदेश पर की गई डीआईजी की जांच में एसपी रामपुर शगुन गौतम और 23 पुलिस कर्मी फंस गए हैं। मामले में अभी कई और अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। इस बारे में भी जांच की जाएगी।
मुठभेड़ का यह मामला छह अप्रैल 2011 का है। उस समय आईपीएस शगुन गौतम रामपुर के एसपी थे। रामपुर पुलिस ने मिलक में शराब तस्करों के साथ मुठभेड़ का दावा करते हुए 32 लाख रुपये की शराब से भरा कैंटर भी पकड़ा था। पुलिस ने रामपुर जनपद के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के ज्वाला नगर की कृष्णा विहार कालोनी निवासी संजीव गुप्ता, रामपुर के थाना कोतवाली के मोहल्ला चादर वाला निवासी अमन भाटिया, रामपुर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र की मक्का मिल कालोनी निवासी राजीव कुमार, हरियाणा के भिवानी जनपद के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के बर्तन बाजार बंशीपाना निवासी राहुल कुमार, बरेली के बहेड़ी थाना क्षेत्र के ग्राम चुरैला निवासी मनोहर लाल को मौके से गिरफ्तार करने का दावा किया था।
आरोपियों को जेल भेज दिया गया था। कुछ समय बाद आरोपी जमानत पर रिहा हो गए थे। इसके बाद संजीव गुप्ता ने पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। उन्होंने आईपीएस शगुन गौतम पर आरोप लगाते हुए तमाम साक्ष्य भी पेश किए थे। संजीव ने शगुन गौतम के इशारे पर उन्हें झूठा फंसाए जाने का आरोप लगाया था। संजीव का कहना था कि उनसे 10 लाख रुपये ले लिए और फर्जी मुठभेड़ दिखाकर जेल भी भेज दिया। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा तो जांच के आदेश दिए गए। मामले की जांच शासन ने डीआईजी शलभ माथुर को सौंपी।
उन्होंने शिकायतकर्ता व गवाहों के साथ पुलिस कर्मियों के बयान भी दर्ज किए। पीड़ित और गवाहों ने बयानों में मुठभेड़ को फर्जी बताया। उन्होंने साक्ष्य भी पेश किए। संजीव ने डीआईजी को अपने घर में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज दिखाई। इसमें एसओजी प्रभारी और उनकी टीम संजीव को उनके घर से ले जाते हुए साफ दिखाई दी। पीड़ित द्वारा कुछ और मजबूत साक्ष्य भी उपलब्ध कराए गए। डीआईजी की जांच में तत्कालीन एसपी शगुन गौतम तथा 23 पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। उन्होंने इस मामले की रिपोर्ट करीब तीन महीने पूर्व ही शासन को भेज दी थी।
अब इस मामले की विस्तृत जांच एसपी रामपुर अशोक कुमार शुक्ला को सौंपी गई है। उनकी जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। -शलभ माथुर, डीआईजी
