अयोध्या : खुद बदहाल, फिर भी 25 साल से छुट्टा पशुओं की सेवा कर रहे बुजुर्ग कालिका

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Edited By Amrit Vichar
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रुदौली/ अयोध्या, अमृत विचार। किसान से लेकर सरकार तक के गले की हड्डी बने छुट्टा जानवरों के लिए विकल्प तलाश रही सरकार के नुमाइंदों की नजर वर्षों से नि:स्वार्थ छुट्टा जानवरों की सेवा कर रहे बुजुर्ग कालिका प्रसाद पर आज तक नहीं पड़ी। वे करीब 25 साल से छुट्टा पशुओं की निस्वार्थ भावना से सेवा …

रुदौली/ अयोध्या, अमृत विचार। किसान से लेकर सरकार तक के गले की हड्डी बने छुट्टा जानवरों के लिए विकल्प तलाश रही सरकार के नुमाइंदों की नजर वर्षों से नि:स्वार्थ छुट्टा जानवरों की सेवा कर रहे बुजुर्ग कालिका प्रसाद पर आज तक नहीं पड़ी। वे करीब 25 साल से छुट्टा पशुओं की निस्वार्थ भावना से सेवा में जुटे हुए हैं। खुद तंगहाली का जीवन जीकर क्षेत्र के छुट्टा पशुओं के खेवनहार बने हुए हैं।

यहां के लोगों का कहना है कि यदि गांव के ऐसे लोगों को प्रोत्साहित किया जाय तो समाज की तमाम ऐसी समस्याएं जो बहुत भारी दिखती है। उसका निदान बड़ी आसानी से की जा सकता है। लगभग दो दशक से छुट्टा पशुओं को संरक्षण देने वाले रुदौली तहसील अंतर्गत ग्राम जमुनियामऊ निवासी दलित बुजुर्ग कालिका प्रसाद पुत्र कल्लू सरकारी महकमे और लोगों के लिए मिसाल हैं। उनकी एक तिहाई उम्र गांव के छुट्टा पशुओं की सेवा में गुजर गई है।

विगत 25 वर्षों से कालिका प्रसाद सुबह से रात तक इन्ही पशुओं की सेवा में जुटे रहते हैं। गरीब कालिका के पास पशुओं की परवरिश के लिए कोई संसाधन तो है नहीं इसलिए उनका पेट भरने के लिए वें उन्हें सुबह से शाम तक चराते हैं। शाम को पशुओं का पेट भर जाने के बाद वे उन्हें अपने दरवाजे पर ले जाकर रख लेते हैं। सुबह होते ही वे अपने इसी काम पर लग जाते हैं। लगभग दो दर्जन पशुओं की देखभाल में ही गरीब बुजुर्ग कालिका का दिन बीत जाता है। इन पशुओं की देखभाल के अलावा उनके पास और कोई काम नहीं है।

ग्रामवासी वरिष्ठ भाजपा नेता जंगजीत मिश्रा ने इस पशु सेवक की बात शासन तक पहुंचाने की बात करते हुए कहा कि बदहाली की हालत में भी जिस तरह कालिका पशु संरक्षण का कार्य नि:स्वार्थ भाव से कर रहे हैं यदि सरकारी नुमाइंदे ऐसी शख्सियत पर ध्यान दें और इन्हें कुछ सुविधा मुहैया कराए तो बेहतर होगा।

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