हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम से प्रकट होहिं भगवाना: मोहित शास्त्री

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बाराबंकी। प्रभु तो सर्वत्र है उन्हें जन्म लेने की आवश्यकता नहीं होती है जहां प्रेम होता है वह वहां भक्ति भाव में स्वयं ही प्रकट हो जाते हैं। उक्त बातें सत्यप्रेमी नगर स्थित दूधेश्वरनाथ महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वृन्दावन से पधारे कथा व्यास मोहित शास्त्री ने कही। गुरूवार को कथा के मूल …

बाराबंकी। प्रभु तो सर्वत्र है उन्हें जन्म लेने की आवश्यकता नहीं होती है जहां प्रेम होता है वह वहां भक्ति भाव में स्वयं ही प्रकट हो जाते हैं। उक्त बातें सत्यप्रेमी नगर स्थित दूधेश्वरनाथ महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वृन्दावन से पधारे कथा व्यास मोहित शास्त्री ने कही। गुरूवार को कथा के मूल में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव प्रसंग रहा।

कथा व्यास ने कारागार में भगवान कृष्ण के जन्म और कारागार से बाहर सुरक्षित पहुंचाने के प्रसंग का वर्णन करते हुए श्रोताओं को यह समझाने की कोशिश कि यहां सब अपने अपने कर्मों और भाग्य के प्रतिफल का परिणाम पाते हैं। धर्म कीर्ति स्थिर है बाकी इस संसार में कुछ भी स्थिर नहीं इस लिए धार्मिक कार्यों में समय देकर पुण्य का अर्जन कर यश कीर्ति में वृद्धि का प्रयास होना चाहिए।

कथा व्यास ने कहा सुयश कमाने का प्रयास होना चाहिए कुयश नहीं । कथा में भगवान श्री कृष्ण के बाद स्वरूप के जन्म की मनमोहक झांकी ने श्रोताओं का मन मोह लिया। श्रीमद्भागवत भागवत कथा के अन्त में राधा कृष्ण के रूप में श्रृंगार किये बच्चो में लोगों ने साक्षात राधा कृष्ण के दर्शन किए।

दूधेश्वरनाथ महादेव मंदिर में ऐसा भक्ति मय वातावरण दिख रहा था मानों स्वयं लीलाधारी कृष्ण अपने भक्तों को दर्शन देने प्रकट हो गए हो। भजनों ने ऐसी शमां बांधी कि उपस्थित लोग इन भजनों में झूमने से खुद को रोक न सके। एक एक कर सभी ने राधा कृष्ण रूप में से कर आये कृष्ण राधा स्वरूप के पैर छू और पुष्प वर्षा कर अपनी मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद लिया।

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