रामपुर: चिट्ठियों में मौत की धमकी से दहशत में अनवा गांव
रामपुर/शाहबाद, अमृत विचार। शाहबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव अनवा में मिलीं आईएसआईएस आतंकी संगठन के नाम की चिट्ठियों में 10 अगस्त को पूरे गांव को सीरीन गैस से मार डालने की धमकी क्या कोरी अफवाह है या फिर इसके पीछे कोई रहस्य छिपा है। पुलिस और प्रशासन इसका कोई रहस्य नहीं उजागर कर सका है। …
रामपुर/शाहबाद, अमृत विचार। शाहबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव अनवा में मिलीं आईएसआईएस आतंकी संगठन के नाम की चिट्ठियों में 10 अगस्त को पूरे गांव को सीरीन गैस से मार डालने की धमकी क्या कोरी अफवाह है या फिर इसके पीछे कोई रहस्य छिपा है। पुलिस और प्रशासन इसका कोई रहस्य नहीं उजागर कर सका है। आज दस अगस्त है, पूरे गांव के लोगों में दहशत है। आखिर क्या होगा, पुलिस ने भी गांव में सुरक्षा के नाम पर चार सिपाही लगा रखे हैं।
मंगलवार को अमृत विचार की टीम ने गांव में अजीब नजारा देखा। चार सिपाही तैनात हैं वो भी चारपाई पर पैर पसारे आराम फरमाते मिले। गांव के कुछ लोगों में खौफ दिखा तो कुछ पर कोई फर्क नहीं था, चिट्ठियों का रहस्य भले ही आईएसआईएस आतंकी संगठन के नाम लिखने भर से हो, लेकिन कहीं न कहीं चिट्ठियां गांव के पार्टीबंदी का परिणाम साबित होती दिख रही हैं। कुलदीप ठाकुर के घर 21 जुलाई को तड़के चार बंद लिफाफे मुख्य दरवाजे पर पास पड़े मिले थे। कुलदीप ने चिट्ठियां खोलकर देखीं तो उन पर उर्दू व अंग्रेजी भाषा में कुछ लिखा हुआ था। इस पर उसने गांव के जानकार व्यक्ति से वह चिट्ठियां पढ़वाई तो उसके होश उड़ गए।
कुलदीप के अलावा अन्य तीन चिट्ठियों में दो उसके सगे चाचा भानुप्रताप सिंह, वीरपाल सिंह और तीसरी चिट्ठी पर गांव निवासी महिला गीता शर्मा का नाम लिखा था। चिट्ठियों में किसी पैन ड्राइव और नक्शों के हवाले के साथ रॉ-एजेंसी और इंटेलीजेंस ब्यूरो जिक्र करते हुए चरों को परिवार सहित जाना से मारने की धमकी दी गई थी। धमकी भरा पत्र मिलने के बाद चारों परिवार दहशत में आ गए। हालांकि घटना के बाद गांव में पुलिस तैनात कर दी गई। लेकिन मोहलत के दिन पूरे होने के बाद भी पुलिस के खाली हाथों ने गांव वालों के धुकधुकी बढ़ा दी है। लिखा था कि 10 अगस्त तक पैन ड्राइव और नक्शे नहीं दिए गए तो सीरीन गैस से गांव के लोगों को मार डालेंगे।
आज मोहलत का आखिरी दिन है, जिस कारण गांव वालों में दहशत बनी हुई है। घटना का खुलासा न होने के कारण गांव वाले चिंतित हैं। पुलिस को जल्द ही घटना का खुलासा करना चाहिए। यदि कोई हादसा हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा। -विजयपाल सिंह राघव, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य
बेफिक्र पुलिस ने फोटो खिंचवाने से किया इंकार
गांव अनवा में गुमनाम चिट्ठियां मिलने के बाद पुलिस तैनात कर दी गई। जहां मोहलत की तारीख से एक दिन पूर्व पुलिस को अलर्ट मोड़ पर होना चाहिए। वहीं पुलिस वाले बेफिक्र मूड में दिखे। वह अपनी तैनाती की जगह पर आराम फरमा रहे थे। वर्दी में न होने के कारण उन्होंने फोटो खिंचवाने से भी इंकार कर दिया। वहीं सीओ धर्म सिंह मार्छाल से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी अनवा में कुछ नहीं है। आज मोहर्रम है मुहर्रम देखिए।
गुटबाजी के चलते ठाकुर बाहुल्य गांव में बनता है दूसरे समुदाय का प्रधान
तहसील क्षेत्र का अनवा गांव ठाकुर बाहुल्य है। लेकिन गांव में गुटबाजी के चलते दूसरे समुदाय का प्रधान बनता है। जिसको लेकर गांव में लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि चिट्ठियां मिलने के कई दिन बीतने के बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। कहीं यह कोई राजनीतिक षड्यंत्र तो नहीं है।
दस अगस्त तक मांगे नक्शे और पेन ड्राइव
खत में देश की मुख्य सुरक्षा, खुफिया एजेंसियों के हवाले से बात की गई है। रॉ-एजेंसी या आईबी की ओर से एक पेन ड्राइव और नक्शे इन चारों परिवारों में से किसी के सुपरविजन में हैं, ये उसे चाहिएं। ये बीस अगस्त को भारत में लाई गई थीं। लेकिन ये नक्शे गृहमंत्री अमित शाह को हैंड ओवर करने के बजाय अधिकारी, मंत्री, जज, नेता इसे बेचने की फिराक में हैं। पेन ड्राइव और नक्शे उसे नहीं दिए गए तो सैरीन गैस गांव में रखकर पूरे गांव को तबाह कर देगा। दो करोड़ कैश और अच्छी सरकारी नौकरी का ऑफर दिया गया है। यह भी कहा है कि उनका एजेंट हर वक्त उन पर नजर रखे हुए हैं। पुलिस या किसी भी सुरक्षा एजेंसी को खबर की तो अंजाम भुगतने को तैयार रहें। उसने दस अगस्त का समय दिया था जो आज पूरा हो रहा है।
पुलिस जानकर नहीं कर रही खुलासा
पुलिस को लगता है सब पता है इस साजिश के पीछे कौन है? जिस तत्परता के साथ पुलिस ने चिट्ठियों को लिया था, अब उतनी तत्परता नहीं है। सूत्रों की मानें तो जिस व्यक्ति की साजिश है, पुलिस ने उसी से साठगांठ कर रखी है। पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई भी नहीं करना चाहती है। इशारा गांव की राजनीति पर है। सवाल यह भी है कि आईएसआईएस आतंकी संगठन का गांव के चार लोगों के नाम पत्र लिखने से क्या औचित्य है? दूसरा गांव का कोई व्यक्ति सेना या रा में भी नहीं है। ऐसे में अगर खुलासा पुलिस करती है तो चिट्ठी लिखकर फेंकने वाले उस व्यक्ति के खिलाफ देश द्रोह का मामला भी बनेगा, लिहाजा अब ऐसे व्यक्ति को बचाने के लिए पुलिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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