SBI Hikes MCLR Rates: एसबीआई ने दिया ग्राहकों को झटका, महंगी हुई EMI, इन लोगों पर होगा असर

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Edited By Amrit Vichar
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नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी क्षेत्र की बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। बैंक ने एक बार फिर EMI महंगा कर दिया है। बैंक ने मार्जिनल कॉस्ट पर आधारित फंड के लेंडिंग रेट (MCLR) में 20 बीपीएस की बढ़ोतरी कर दी। बढ़ी हुई दरें शुक्रवार यानि 15 …

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी क्षेत्र की बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। बैंक ने एक बार फिर EMI महंगा कर दिया है। बैंक ने मार्जिनल कॉस्ट पर आधारित फंड के लेंडिंग रेट (MCLR) में 20 बीपीएस की बढ़ोतरी कर दी। बढ़ी हुई दरें शुक्रवार यानि 15 अगस्त से लागू हो गई हैं।

दरअसल, इससे पहले एसबीआई ने पिछले महीने भी एमसीएलआर रेट में 10 बेसिस अंक की बढ़ोतरी की थी। बता दें कि 5 अगस्त, 2022 को आरबीआई ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान किया था जिसके बाद निजी क्षेत्र से लेकर सरकारी बैंकों द्वारा कर्ज महंगा किया जा रहा है।

कितना बढ़ा एमसीएलआर
बैंक ने तीन महीने में तीसरी बार दरों में बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद ओवरनाइट से तीन महीने की अवधि के लिए एमसीएलआर रेट 7.15 फीसदी से बढ़कर 7.35 फीसदी हो गया है। इसी तहत छह महीने का एमसीएलआर रेट 7.45 फीसदी से बढ़कर 7.65 फीसदी हो गया है। एक और दो साल का रेट अब 7.7 फीसदी से बढ़कर 7.9 फीसदी और तीन साल का रेट 7.8 फीसदी से बढ़कर आठ फीसदी हो गया है।

किन ग्राहकों पर होगा असर
बैंक के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जिन्होंने होम, ऑटो या पर्सनल लोन ले रखा है। इससे आने वाले महीनों में उनकी ईएमआई (EMI) बढ़ेगी।

क्या होता है MCLR
बता दें मौजूदा समय में सभी फ्लोटिंग रेट्स वाले लोन एमसीएलआर या फिर एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट से जुड़ा है। अप्रैल 2016 में एमसीएलआर अस्तित्व में आया था। आरबीआई के नए गाइडलाइंस के मुताबिक अब कमर्शियल बैंक बेस रेट के बदले मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट यानी एमसीएलआर के आधार पर कर्ज देते हैं। एमसीएलआर को निर्धारित करने के लिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बहुत मायने रखता है। रेपो रेट में कोई भी बदलाव होने पर मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड में तब्दीली आती है। फ्लोटिंग रेट पर ग्राहकों ने जो लोन लिया हुआ है उसके रीसेट डेट जब आएगा तो नए एमसीएलआर के आधार पर ग्राहकों के लोन की ब्याज दरों तय की जाएगी जिसके बाद उनकी ईएमआई महंगी हो जाएगी।

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