Suicide Machine : ‘बड़े आराम’ से ‘मौत की नींद’ सुला देता है ये खूबसूरत देश

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बर्न। पिछले सप्ताह एक महिला ने बीमारी के कारण इच्छामृत्यु के लिए स्विट्जरलैंड जा रहे अपने एक दोस्त को रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। गुरुवार को महिला ने अपनी याचिका वापस ले ली। उसके वकील का कहना है कि याचिकाकर्ता का दोस्त इस बारे में सुनकर बहुत ‘आहत’ है …

बर्न। पिछले सप्ताह एक महिला ने बीमारी के कारण इच्छामृत्यु के लिए स्विट्जरलैंड जा रहे अपने एक दोस्त को रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। गुरुवार को महिला ने अपनी याचिका वापस ले ली। उसके वकील का कहना है कि याचिकाकर्ता का दोस्त इस बारे में सुनकर बहुत ‘आहत’ है जिसने याचिकाकर्ता को ‘असमंजस’ में डाल दिया है और अब वह अपनी याचिका को वापस लेना चाहती है। इच्छामृत्यु जैसा कठोर निर्णय लेने के लिए आखिर क्यों लोग स्विट्जरलैंड का रुख करते हैं, आइए जानते हैं…

इच्छामृत्यु क्या होती है?
जब कोई इंसान स्वेच्छा से मृत्यु को स्वीकार करता है तो उसे इच्छामृत्यु कहते हैं। यह खुदकुशी से अलग होता है क्योंकि इसमें इंसान डॉक्टर की सहायता से किसी चिकित्सीय विधि से अपने जीवन का अंत करता है। आमतौर पर इच्छामृत्यु को अपनाने वाले लोग या तो भयानक दर्द से जूझ रहे होते हैं या फिर किसी लाइलाज बीमारी की चपेट में होते हैं। कुछ देशों में इच्छामृत्यु कानूनी तौर पर वैध है जिसमें स्विट्जरलैंड भी शामिल है।

स्विट्जरलैंड में इच्छामृत्यु का कानून
स्विट्जरलैंड में इच्छामृत्यु को 1942 से कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त है। साल 2020 में करीब 1300 लोगों ने अलग-अलग संगठनों की मदद से इच्छामृत्यु को स्वीकार किया था। पिछले साल दिसंबर में स्विट्जरलैंड की सरकार ने इच्छामृत्यु की एक मशीन को कानूनी मंजूरी दे दी थी जिसे ‘सुसाइड पॉड’ नाम दिया गया था। इस मशीन का निर्माण एनजीओ एग्जिट इंटरनेशनल के डायरेक्टर डॉ फिलिप निश्के की मदद से किया गया था जिन्हें ‘डॉक्टर डेथ’ के नाम से भी जाना जाता है। इस मशीन की बड़े पैमाने पर आलोचना भी हुई थी।

suicide pod

सिर्फ 1 मिनट में मौत की नींद
आलोचकों ने कहा कि यह मशीन आत्महत्या को बढ़ावा देगी जबकि इसके बचाव में लोगों ने कहा कि यह लोगों को असहनीय दर्द से मुक्ति देगी। इस मशीन का आकार एक ताबूत जैसा है जिसे अंदर बैठकर भी ऑपरेट किया जा सकता है। खबरों की मानें तो यह मशीन सिर्फ 1 मिनट में बिना दर्द के शांतिपूर्ण तरीके से लोगों को मौत की नींद सुला सकती है। इसके भीतर ऑक्‍सीजन का स्‍तर बहुत कम हो जाता है जिससे इंसान की हायपोक्सिया और हाइपोकैनिया से मौत हो जाती है।

भारतीय मरीज को चाहिए दर्द से छुटकारा
हालांकि यह मशीन सभी के लिए नहीं है। यह मशीन ऐसे मरीजों के लिए मददगार है जो बीमारी के कारण बोल नहीं पाते हैं या हिल नहीं पाते हैं। इच्छामृत्यु के लिए स्विट्जरलैंड जाने की चाह रखने वाला भारतीय मरीज ‘मायलजिक एन्सेफैलोमाइलाइटिस’ बीमारी से पीड़ित है। मरीज की उम्र 45 से 49 के बीच की है और वह डॉक्टरों की मदद से मौत की नींद सोना चाहता है।

ये भी पढ़ें : पाकिस्तान में कम दाम वाली कार की कीमत 40 करोड़!, IMF के चक्कर में फंसे शहबाज

संबंधित समाचार