बरेली: चौड़ी सड़कों से व्यापारियों पर बढ़ेगा बोझ, देना होगा अधिक टैक्स

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बरेली, अमृत विचार। पहले सड़कें छोटी थीं तो लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता था। अब जब सड़कें चौड़ी हो गईं तो खासकर व्यापारियों के लिए सिरदर्द बन गई है। व्यापारियों पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा। नगर निगम ने चौड़ी सड़कों पर अधिक टैक्स वसूलेगा। इसकी रणनीति तैयार कर ली है। इसमें वे …

बरेली, अमृत विचार। पहले सड़कें छोटी थीं तो लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता था। अब जब सड़कें चौड़ी हो गईं तो खासकर व्यापारियों के लिए सिरदर्द बन गई है। व्यापारियों पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा। नगर निगम ने चौड़ी सड़कों पर अधिक टैक्स वसूलेगा। इसकी रणनीति तैयार कर ली है। इसमें वे दुकानदार भी प्रभावित होंगे, जो सड़कों के किनारे दुकानें चला रहे हैं। यह टैक्स निगम स्वयं नहीं लगाएगा। शासन से तय स्लैब के अनुसार ही टैक्स लगेगा। इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित कामर्शियल गतिविधि करने वाले लोग ही होंगे।

शहर में बीडीए ने कई सड़कों का चौड़ीकरण किया है। जोन चार में झूलेलाल द्वार से स्वयंवर बरातघर तक पहले सड़क डिवाइडर के दोनों तरफ मिलाकर 11 मीटर चौड़ी थी, लेकिन अब डिवाइडर मिलाकर इसकी चौड़ाई 15.70 मीटर हो गई है। यही हाल शील चौराहे से स्वयंवर बरात घर तक मार्ग का है। धर्मकांटे से मूर्ति नर्सिंग होम तक भी सड़क की चाैड़ाई लगभग 15 मीटर हो गई है।

जोन दो में प्रभा सिनेमा के सामने की रोड 24 मीटर से ज्यादा है। कालीबाड़ी और पटेल चौक से चौपुला चौराहा तक रोड भी 24 मीटर से ज्यादा चौड़ी है। पटेल चौक से चौकी चौराहा वाली रोड भी चौड़ाई में ज्यादा है। जबकि सिविल लाइंस हनुमान मंदिर के सामने वाली रोड 24 मीटर से कम चौड़ी है। जाहिर है नियमों का पालन नगर निगम ने किया तो इन जगहों पर चलने वाले शो रूम, दुकानों का टैक्स बढ़ना तय है।

सड़क की चौड़ाई के अनुसार यह है टैक्स की श्रेणी
निगम में सड़कों की चौड़ाई के अनुसार टैक्स की तीन श्रेणियां हैं। इन श्रेणियों के अनुसार ही शहर में काॅमर्शियल टैक्स लगाया जाता है।

  • 0 से 12 मीटर चौड़ी सड़क पर 1.32 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर
  • 12 से 24 मीटर चौड़ी सड़क पर 1.90 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर
  • 24 से ज्यादा चौड़ी सड़क पर 2.40 रुपया प्रति स्क्वायर मीटर

टैक्स लगाने में होता है खेल, टैक्स अधीक्षक भी हो चुके हैं निलंबित
निगम में टैक्स लगाने और वसूलने की जिम्मेदारी निभाने वाले लोग किसी चहेते को टैक्स में लाभ पहुंचाना चाहते हैं तो सड़क की चौड़ाई और जगह कम दिखाकर कम टैक्स लगा देते हैं। इससे निगम को राजस्व हानि हो जाती है। पिछले साल जोन एक में कार शो रूम का टैक्स लगाने में निगम कर्मचारियों ने खेल किया था।

मामले में दो टैक्स अधीक्षकों को शासन ने निलंबित कर दिया था। मामला उछलने पर तत्कालीन नगर आयुक्त ने कुछ कर्मचारियों को भी निलंबित कर दिया था। शासन द्वारा निलंबित कर्मी अब भी निलंबित चल रहे हैं, जबकि तत्कालीन नगर आयुक्त ने एक सप्ताह बाद ही कर्मचारियों को बहाल कर दिया था। इस तरह की दोहरी कार्यप्रणाली से निगम में काम होने से राजस्व पर असर पड़ना लाजिमी है। उस मामले में अब भी पूरा टैक्स जमा नहीं कराया गया है।

जीआईएस सर्वे के अनुसार टैक्स लगाने पर बढ़ेगा राजस्व
सर्वे में कई जगहों पर टैक्स कम लगने की बात सामने आई है। किसी का एक मंजिल मकान या दुकान थी तो उसने दो मंजिल बना ली। इससे टैक्स बढ़ेगा। दुकान की माप भी वास्तविक आई है। ऐसी दशा में सड़क की चौड़ाई के अनुसार टैक्स लगेगा तो आय बढ़नी लाजिमी है। अधिकारी भी मानते हैं कि टैक्स रिवीजन होने पर चौड़ाई के अनुसार रेट देखा जाएगा। फार्मूले के अनुसार ही टैक्स लगेगा। जिनका पुरानी दर से टैक्स चल रहा है। उनका नया लगेगा। जिनका नहीं लगा है। उन पर टैक्स लगाया जाएगा।

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