बिजनौर में लगे सांसद “मलूक नागर” के गुमशुदा होने के पोस्टर
बिजनौर, अमृत विचार। बिजनौर बसपा सांसद मलूक नागर के गुमशुदा की तलाश के पोस्टर शहर में जगह-जगह पर चस्पा हुए मिलने से बसपाइयों मे हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस इस मामले मे जांच करने की बात कहें रहीं है। पूरे देश में लॉक डाउन के चौथे चरण के बाद जैसे ही अनलॉक का पहला चरण …
बिजनौर, अमृत विचार। बिजनौर बसपा सांसद मलूक नागर के गुमशुदा की तलाश के पोस्टर शहर में जगह-जगह पर चस्पा हुए मिलने से बसपाइयों मे हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस इस मामले मे जांच करने की बात कहें रहीं है।
पूरे देश में लॉक डाउन के चौथे चरण के बाद जैसे ही अनलॉक का पहला चरण शुरू हुआ है वैसे ही बिजनौर की सियासत भी गरमा गई है। लॉक डाउन में दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद सरकार की ओर से शर्तों के साथ छूट मिलने पर अब लोगों ने घरों से बाहर निकलना शुरू कर दिया है । घर से बाहर निकलते ही सांसद गुमशुदा की तलाश के पोस्टर चस्पा हो जाने से जिले में राजनैतिक सियासत गरमा गई है ।
रविवार को जब लोग घरों से बाहर निकले तो उन्होंने मोहल्ले की दीवारों, रिक्शाओ के ऊपर सांसद गुमशुदा की तलाश के पोस्टर चस्पा देखें तो लोग हैरान रह गए। चस्पा किए गए पोस्टर में सांसद को बिजनौर वासियों से मिलाने के लिए कहा गया कि अगर सांसद जी कहीं पर मिल जाते हैं तो बिजनौर वासियों को सूचित कर दिया जाए। देखते ही देखते यह खबर पूरे जिले में आग की तरह फैल गई।
पिछला लोकसभा चुनाव बाहर से आकर बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर सांसद मलूक नागर ने बिजनौर से लड़ा था । जिसमें वह विजयी घोषित हुए थे। जनपद बिजनौर से बाहर का होने के कारण सांसद मलूक नागर बिजनौर में अपना समय नहीं दे पाए जिससे नाराज होकर जनता ने शहर में जगह-जगह मलूक नागर सांसद का फोटो जारी करते हुए गुमशुदा की तलाश के पोस्टर चस्पा करा दिए।
शहर में जगह-जगह पोस्टर चस्पा होने से सोई हुई सियासत भी गरमा गई है । बसपा समर्थक इसे विपक्षी पार्टियों की साजिश मान कर चल रहे हैं। इस संबंध में जब हमने सांसद मलूक नागर से फोन पर संपर्क साधने की कोशिश की तो आपका फोन स्विच ऑफ था।
बिजनौर लोकसभा सीट पर 30 साल बाद बसपा परचम लहराने में कामयाब रही। 1989 में बसपा सुप्रीमो मायावती के बाद कोई भी बसपाई बिजनौर लोकसभा सीट पर चुनाव नहीं जीत पाया था। नगीना लोकसभा सीट भी पहली बार बसपा की झोली में गई थी।
बिजनौर जिले में बसपा का जलवा चलता रहा है। 2007 के विधानसभा चुनाव में जिले की सभी सात विधानसभा सीटों पर बसपा ने काबिज होकर इतिहास रच दिया था। 1989 में बसपा सुप्रीमो मायावती ने बिजनौर से अपनी राजनीति की शुरूआत की थी। बिजनौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर मायावती पहली बार सांसद बनीं थीं। उन्होंने जनता दल के मंगलराम प्रेमी को चुनाव में मात दी थी।
मायावती के बाद बसपा के दिग्गज बिजनौर लोकसभा सीट से अपनी किस्मत तो आजमाते रहे, पर विजय पताका नहीं फहरा सके। सांसद बने मलूक नागर भी दूसरी बार बसपा के टिकट पर बिजनौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े। इस बार उन्हें चुनाव जीतने में सफलता मिल गई। मायावती के बाद मलूक नागर अकेले ऐसे नेता हैं जो बसपा के टिकट पर चुनाव जीते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं बसपा सुप्रीमो मायावती ने अकेले अपने दम पर बिजनौर लोकसभा सीट पर परचम लहराया था। 30 साल बाद पार्टी के इस प्रदर्शन से बसपा कार्यकर्ताओं में भी जोश था। लेकिन वर्तमान में जगह-जगह पोस्टर चस्पा होने से बसपा की जमकर किरकिरी हो रही है ।
