बरेली: रास्ता खोलने के पक्षधर तो कुछ नहीं चाहते कैंपस से खोला जाए रास्ता

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बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले (एमजेपी) रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन को डोहरा गौटियां गांव का रास्ता रोकने का दांव उलटा पड़ गया है। उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) सदर ईशान प्रताप सिंह की ओर से रास्ता खोलने का नोटिस जारी होने के बाद से विवि के अधिकारी बेचैन हैं। वे रास्ता बंद रखने के पक्षधर हैं। इस संबंध …

बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले (एमजेपी) रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन को डोहरा गौटियां गांव का रास्ता रोकने का दांव उलटा पड़ गया है। उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) सदर ईशान प्रताप सिंह की ओर से रास्ता खोलने का नोटिस जारी होने के बाद से विवि के अधिकारी बेचैन हैं।

वे रास्ता बंद रखने के पक्षधर हैं। इस संबंध में सोमवार को भी अधिकारियों और सुरक्षा से जुड़ी टीम की बैठक हुई। विवि के ही कुछ अधिकारी इस बात पर अड़े हैं कि वर्ष 1997 का समझौता कानूनन वैध नहीं है।

बहरहाल, सोमवार को अवकाश था। शाम तक डोहरा वाला मार्ग नहीं खोला गया। मार्ग पर करीब चार फिट गहरी खाईं लगी है। अप्रैल में मार्ग बंद कराए जाने के दौरान इसे खोदा गया था। सूत्रों के मुताबिक कुछ लोग चाहते हैं कि रास्ता खोलकर विवाद का पटाक्षेप कर दिया जाए।

वहीं, कुछ शिक्षक मार्ग न खोलने के समर्थक हैं। यही कारण है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा है। अभी इस मामले में पैरवी का दौर चल रहा है। ग्रामीणों की ओर से भी प्रशासन के समक्ष मजबूत साक्ष्य पेश किए गए थे, जिनका संज्ञान लेकर ही नोटिस जारी हुआ है।

दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन इस प्रकरण में शासन और राजभवन दोनों स्तर से पैरवी के प्रयास में लगा है। दरअसल, कैंपस के अंदर से डोहरा गांव को एक रास्ता जाता है। इस पर 27 साल से विवाद है। लाकडाउन में विवि ने यह मार्ग बंद कर दिया था। इसके बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन में शिकायत की थी।

आज अवकाश है। मंगलवार को कार्यालय खुलेगा। तभी मार्ग के संबंध में अधिकारिक स्तर पर कोई निर्णय लिया जाएगा। अभी इस संबंध में अधिक नहीं कहा जा सकता है।
– जहीर अहमद, सहायक मीडिया प्रभारी, एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय

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