कानपुर : मेडिकल कॉलेज में 51 फीसद महिला डॉक्टरों की हड्डियां कमजोर
अमृत विचार, कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की 51 फीसद महिला डॉक्टरों की हड्डियां कमजोर हैं। उनमें किसी तरह चोट लगने पर आसानी से फ्रैक्चर की समस्या हो सकती है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को जच्चा बच्चा अस्पताल में कराई गई बोन मैरो डेंसिटी टेस्ट (बीएमडी) में आई है। उन्हें कैल्शियम, विटामिन डी की दवाएं और इनसे …
अमृत विचार, कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की 51 फीसद महिला डॉक्टरों की हड्डियां कमजोर हैं। उनमें किसी तरह चोट लगने पर आसानी से फ्रैक्चर की समस्या हो सकती है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को जच्चा बच्चा अस्पताल में कराई गई बोन मैरो डेंसिटी टेस्ट (बीएमडी) में आई है। उन्हें कैल्शियम, विटामिन डी की दवाएं और इनसे भरपूर भोजन लेने की सलाह दी गई है। अधिकतर महिला डॉक्टरों की कमर, कंधे, पीठ और अन्य हड्डियों में दर्द की समस्या रहती है। इनमें 35 से 58 वर्ष की डॉक्टर शामिल हैं।
जच्चा बच्चा अस्पताल में महिला डॉक्टरों, नर्स और अन्य महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए मेनोपॉज क्लीनिक का आयोजन किया गया, जिसमें बीएमडी के साथ ही पैप स्मीयर टेस्ट कराया गया। पैप स्मीयर गर्भाश्य के मुख के कैंसर की जांच के लिए होता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग की एचओडी प्रो. नीना गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर महिला डॉक्टर जानकारी होने के बावजूद अस्पताल और घर की दोहरी जिम्मेदारियों को निभाते हुए बीएमडी की स्क्रीनिंग नहीं कराती हैं।
समस्या बढ़ने पर ही जांच कराती हैं, लेकिन इसमें समस्या बढ़ जाती है। डॉ. शैली अग्रवाल ने बताया कि ओस्टियोपोरोसिस (एक तरह की कमजोर हड्डियों की समस्या)को समय रहते रोका जा सकता है। वहीं डॉ. गरिमा गुप्ता ने बताया कि 90 महिला डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ ने बीएमडी टेस्ट कराया और उसमें लगभग 51 फीसद ओस्टियोपेनिक अर्थात ऑस्टियोपोरोसिस से पहले की कमजोर हड्डियों की अवस्था मिली, 14.4 फीसद महिला स्वास्थ्य कर्मियों में ओस्टियोपोरोसिस पाया गया।
यह भी पढ़ें:- लखीमपुर-खीरी: न डॉक्टर, न दवाएं और बेड ऐसे में कैसे चलाएं जिला अस्पताल की इमरजेंसी
