अयोध्या धाम में बिछाई जा रही है मेन और स्पेयर लाइन, अंडरग्राउंड केबल की खराबी को मिनटों में ढूंढेगी
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में अंडरग्राउंड केबल डालने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। अब तक 50 फीसदी काम पूरा भी हो चुका है। केबल के भूमिगत होते ही लोगों को तारों के मकड़जाल से मुक्ति मिल जाएगी, लेकिन आपके जेहन में ये बात जरूर होगी कि अंडरग्राउंड केबल में खराबी आने पर इसे …
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में अंडरग्राउंड केबल डालने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। अब तक 50 फीसदी काम पूरा भी हो चुका है। केबल के भूमिगत होते ही लोगों को तारों के मकड़जाल से मुक्ति मिल जाएगी, लेकिन आपके जेहन में ये बात जरूर होगी कि अंडरग्राउंड केबल में खराबी आने पर इसे बनाया कैसे जाएगा? अभी तो केबल बाहर हैं तो खराबी तुरंत पकड़ में आ जाती है आखिर बाद में क्या होगा? इसकी जानकारी आज आपको सबसे पहले अमृत विचार देने जा रहा है। इसके साथ ही कुछ और तकनीकि पहलुओं से भी रूबरू कराएगा।
अंडरग्राउंड केबलों को डालने का काम अभी सिर्फ अयोध्या नगरी में ही हो रहा है। तकरीबन 180 करोड़ रुपये से अंडरग्राउंड केबल डालने का काम चल रहा है, जिसे अगले साल 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद सड़कों पर फैले तारों के जंजाल से लोगों को मुक्ति मिल जाएगी। भविष्य में अंडरग्राउंड केबल में अगर खराबी आती है तो इसके लिए फाल्ट लोकेटेड मशीनों को रखा गया है।
जो उसकी मरम्मत का काम करेगी। विद्युत विभाग के अनुसार इस पूरे काम की देखरेख का जिम्मा एलएनटी के पास है। एलएनटी भारत की टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है। इसी के पास दो फाल्ट लोकेशन मशीनें हैं। मान लीजिए, अयोध्या के टेढ़ी बाजार के किसी मोहल्ले में केबल में गड़बड़ी आती है तो फाल्ट लोकेशन मशीन उस मेन प्वाइंट पर पहुंचेगी, जहां से केबल का सिरा शुरू होता है। केबल को मशीन में छुआते ही बीप की आवाज आएगी।
इसके बाद मशीन में लगा जीपीएस सिस्टम इलाके के उस स्थल को चिह्नित कर देगा, जहां पर केबल में फाल्ट आई होगी। इसके बाद बिजली विभाग के कर्मी वहां खोदाई कर केबल की मरम्मत का कार्य करेंगे। बता दें कि ऊर्जा मंत्रालय, एनटीपीसी टांडा और अयोध्या जिला प्रशासन द्वारा उज्ज्वल भारत, उज्ज्वल भविष्य पावर 2047 कार्यक्रम के अंतर्गत बिजली के तारों को भूमिगत किया जा रहा है।
उपकेंद्रों से जुड़ी रहेंगी मेन व स्पेयर केबल
अंडरग्राउंड में दो तरह की केबल डाली जा रही है, जिसमें मेन लाइन 11 हजार व दूसरी स्पेयर लाइन 740 की होगी। इन दोनों लाइन के लिए अलग-अलग फॉल्ट लोकेटेड मशीन है। दोनों ही लाइन विघुत उपकेंद्रों से जुड़ी रहेंगी।
मान लीजिए किसी इलाके की मेन लाइन गड़बड़ होती है तो उसकी मरम्मत के दौरान स्पेयर लाइन से बिजली आपूर्ति बहाल की जाएगी। यह विद्युत विभाग के लिए ही नहीं बल्कि लोगों के लिए भी काफी सहुलियत वाली रहेगी। अक्सर देखा जाता है कि देर तक हुई कटौती के बाद उपभोक्ता परेशान होने लगते हैं, लेकिन अंडर ग्राउंड केबल लगने से सारी दिक्कतें दूर हो जाएंगी।
2025 तक एलएनटी के जिम्मे होगी देखरेख
अभी यह पूरा प्रोजेक्ट एलएनटी के जिम्मे है। 2023 में विद्युत विभाग को हैंडओवर करने के दो साल बाद तक भी अंडरग्राउंड केबलों की देखरेख का जिम्मा एलएनटी के पास ही रहेगा। फॉल्ट लोकेशन मशीन भी अभी एलएनटी के पास ही है। मशीन को वैन में लगाया गया है। गड़बड़ी आते ही ये मशीनें मौके पर उपस्थित होंगी।
बिजली उपभोक्ताओं को भी झेलना पड़ सकता है संकट
भूमिगत बिजली लाइन को लेकर आम उपभोक्ताओं को संकट झेलना पड़ सकता है। उनके घरेलू कनेक्शन की केबल में फाल्ट आने पर उसकी मरम्मत में समय लगेगा। बताया जाता है कि आम उपभोक्ताओं के घरों तक पीबीसी पाइप लाइन के जरिये केबल पहुंचाई जायेगी। यदि उनके केबल में कोई फाल्ट आती है तो शिकायत के निस्तारण में समय लगेगा।
अभी तक केबल खराब होने पर उपकेंद्र में शिकायत का निस्तारण जल्द हो जाता है, लेकिन उपभोक्ताओं की निजी केबल में फाल्ट ढूंढने में इसलिए समय लगेगा कि संबंधित उपकेंद्र उसे एलएनटी को रेफर करेगा। एलएनटी अपनी डिटेक्ट मशीन से फाल्ट तलाशने के बाद संबंधित उपकेंद्र को सूचित करेगा। अभी तक खंभे से फाल्ट जल्दी पता लग जाती है। एसडीओ टाऊन आर बी वर्मा का कहना है कि आम उपभोक्ताओं को दिक्कत आयेगी।
अयोध्या में भूमिगत बिजली लाइन का 50 फीसदी कार्य पूरा हो गया है। अगर कभी अंडरग्राउंड केबल में खराबी आती है तो फाल्ट लोकेटेड मशीन का इस्तेमाल किया जाएगा। अभी तक कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई है। – प्रदीप कुमार वर्मा, अधिशासी अभियन्ता, विघुत वितरण खंड प्रथम
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