वो बेचते हैं बच्चों की मुस्कान, उदास है उनकी जिंदगी
मुरादाबाद, मोहित गौर। मेरे पुख्ता इरादे खुद मेरी तकदीर बदलेंगे मैं मोहताज नहीं हाथों में किस्मत की लकीरों का किसी मशहूर शायर की ये पंक्तियां उस शख्स पर चरितार्थ होती हैं जिसे किस्मत ने कई जख्म दिए हैं लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। वो चल नहीं सकता, उसकी पत्नी भी दिव्यांग है। न कोई सहारा, …
मुरादाबाद, मोहित गौर। मेरे पुख्ता इरादे खुद मेरी तकदीर बदलेंगे मैं मोहताज नहीं हाथों में किस्मत की लकीरों का किसी मशहूर शायर की ये पंक्तियां उस शख्स पर चरितार्थ होती हैं जिसे किस्मत ने कई जख्म दिए हैं लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। वो चल नहीं सकता, उसकी पत्नी भी दिव्यांग है।
न कोई सहारा, न कोई मददगार, किस्मत ने उसे जख्म दिए और व्यवस्था उन जख्मों को कुरेदने में लगी है। उसके सिर पर चार साल की बच्ची के पालन-पोषण की जिम्मेदारी है। बस यही एक जिम्मेदारी इस बेबसी में उनके मुस्कराने की वजह है। गली-मोहल्लों में फेरी लगाकर बच्चों की ‘मुस्कान’ बेचता है।
किसी मेहरबान ने उसे एक जुगाड़ गाड़ी दी तो कुछ राहत मिली लेकिन पुलिस ने जुगाड़ गाड़ी पर भी लाठियां बरसा दीं। फिलहाल यह शख्स मायूस है और उसे किसी मसीहा का इंतजार है। दिव्यांगता को दरकिनार कर खुद अपनी किस्मत को संवारने में लगे इस शख्स का नाम मोहम्मद शमशाद है।
वह हड्डी मिल काशीराम कालोनी में रहते हैं। जन्म के बाद से मोहम्मद शमशाद दिमागी रूप से तो बड़े हो गए लेकिन उनके शरीर ने उनका साथ नहीं दिया। लगभग साढ़ेतीन फुट के शमशाद अपना जीवन यापन करने के लिए खिलौने बेचते हैं। इस काम में उनका साथ देती हैं दिव्यांग पत्नी तस्लीमा।
वह पूरी तरह से चल नहीं सकती हैं लकिे न हर कदम पर पति के साथ खड़ी नजर आती हैं। रोजाना दोनों अपनी चार साल की मासूम बेटी को साथ लेकर जुगाड़ गाड़ी से गली-मोहल्ले में खिलौने बेचने निकलते हैं। शमशाद गाड़ी चलाते हैं तो पत्नी और बच्ची पीछे बैठकर खिलौने बेचने के लिए आवाज लगाते हैं।
मेहनत देखकर एक रहमदिल ने दिला दी जुगाड़ गाड़ी
शमशाद बताते हैं कि ट्राई साइकिल के चारों ओर गुब्बारे बांधकर वह गलियों में फेरी लगाते थे। रोजाना कई किलोमीटर तक वह हाथों से ट्राई साइकिल के पहिए खींचा करते थे। आखिरकार एक दिन उनकी यह मेहनत किसी रहमदिल को भा गई। उसने दूसरा काम करने की सलाह दी तो शमशाद की दिव्यांगता आड़े आ गई। फिर उस रहमदिल ने 40 हजार रुपये से एक जुगाड़ गाड़ी बनवाकर दी।
