कानपुर में भूगर्भ जल में मिला यूरेनियम, डीएम करेंगे IIT डायरेक्टर और शोधकर्ताओं के साथ बैठक
कानपुर। कानपुर और कानपुर देहात के भूगर्भ जल में रोडियो एक्टिव पदार्थ यूरेनियम मिलने की खबर अमृत विचार के 28 और 29 अगस्त के अंक में प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। डीएम विशाख जी अय्यर ने इस संबंध में आईआईटी के शोधकर्ताओं और डायरेक्टर के साथ इस मुद्दे पर बैठक करने …
कानपुर। कानपुर और कानपुर देहात के भूगर्भ जल में रोडियो एक्टिव पदार्थ यूरेनियम मिलने की खबर अमृत विचार के 28 और 29 अगस्त के अंक में प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। डीएम विशाख जी अय्यर ने इस संबंध में आईआईटी के शोधकर्ताओं और डायरेक्टर के साथ इस मुद्दे पर बैठक करने का निर्णय लिया है। वे अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित शोध पत्र का अध्ययन कराएंगे और इस रिपोर्ट को शासन को भी भेजेंगे।
अमृत विचार संवाददाता से बात करते हुए डीएम ने पहले तो कानपुर के भूगर्भ जल में यूरेनियम मिलने पर ही आश्चर्य जताया। बोले यूरेनियम रेडियो एक्टिव पदार्थ है। यह कानपुर के पानी में कैसे मिल सकता है अगर मिला है तो बहुत ही गंभीर बात है। इस पर जरूरी कदम उठाएंगे।
आईआईटी के अर्थ साइंस विभाग के प्रो. इंद्रशेखर सेन और शोधार्थी डॉ. सरवर निजाम ने कानपुर नगर और कानपुर देहात के 192 क्षेत्रों के इंडिया मार्क टू हैंडपंपों के पानी के नमूनों की जांच की थी। जांच के दौरान यह पाया कि 30 फीसद हैंडपंपों के पानी में यूरेनियम की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक (30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर) से कहीं ज्यादा है।
शहर के चकेरी के कुछ हैंडपंपों के नमूनों में तो यूरेनियम की मात्रा मानक से दस गुणा ज्यादा मिली है। चकेरी और आसपास के क्षेत्र में यूरेनियम का 253.29 माइक्रोग्राम प्रति लीटर स्तर मिला है। यह मानक से कई गुणा अधिक है। गांधीग्राम जीटी रोड में 92.88, दहेली सुजानपुर में 43.06, पुरवामीर में 39.95 माइक्रोग्राम प्रति लीटर मात्रा मिली है।
सकरावां में 116.36, सिहारी, घाटमपुर में 114.14, रहिमपुर विषधन में 112.83 माइक्रोग्राम प्रति लीटर यूरेनियम पाया गया है। धूल, चौबेपुर, झींझक, मैथा, खानचंदपुर, भौंती,फतेहपुर में भी यूरेनियम का स्तर खतरनाक है। डीएम विशाख जी अय्यर ने कहा कि अगर पानी में यूरेनियम मिला है तो यह चिंताजनक बात है।
कहां से आया और इसका स्तर क्या है आदि जानकारी के लिए वे आईआईटी डायरेक्टर और शोधकर्ताओं के साथ बात करेंगे। इसके दुष्प्रभाव से लोगों को बचाने के लिए क्या कदम उठाया जा सकता है इस पर भी चर्चा होगी।
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