कानपुर: हैवी मैटल्स के मरीजों पर पड़ रहे असर का शोध करेंगे डॉक्टर
कानपुर, अमृत विचार। कानपुर और कानपुर देहात के भूमिगत जल में यूरेनियम मिलने से डॉक्टर भी हैरान हैं। उनका कहना है कि स्थाई या अस्थाई तौर पर शरीर को बेहद नुकसान पहुंचा सकता है। अब यह रेडियो एक्टिव है या नहीं यह तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा। फिलहाल जमीन के अंदर पानी …
कानपुर, अमृत विचार। कानपुर और कानपुर देहात के भूमिगत जल में यूरेनियम मिलने से डॉक्टर भी हैरान हैं। उनका कहना है कि स्थाई या अस्थाई तौर पर शरीर को बेहद नुकसान पहुंचा सकता है। अब यह रेडियो एक्टिव है या नहीं यह तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा। फिलहाल जमीन के अंदर पानी में मिलने वाले हैवी मैटल्स के शरीर पर पड़ने वाले असर को लेकर शोध किया जाएगा। यह शोध जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के कई विभाग मिलकर कर सकते हैं। सबसे अधिक पेट के रोगी हैलट अस्पताल की ओपीडी में आते हैं। यहां कानपुर ही नहीं आसपास के लिवर, गुर्दा, पेट में सक्रमण, आंतों में सूजन, अल्सर आदि की समस्या लेकर आ रहे हैं। काफी संख्या में गंभीर मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है।
गैस्ट्रो के डॉ. विनय कुमार ने बताया कि यूरेनियम के असर की जांच करना संभव नहीं है। आईआईटी के पास उपकरण हैं। यह सुविधा अभी पीजीआई के पास भी नहीं है, लेकिन कई अन्य हैवी मैटल्स के प्रभाव पर शोध किया जा सकता है। लेड और एसबेस्टस की चपेट में आए कई रोगियों का इलाज चल रहा है। इन रोगियों के अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई में कुछ भी नहीं आता है। प्राइवेट में कुछ विशेष तरह की जांच होती है, जिससे मरीजों में समस्या का पता चलता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला ने बताया कि मेडिकल कॉलेज हैवी मैटल्स पर शोध करने की प्लानिंग कर रहा है। इसमें आईआईटी का सहयोग भी लिया जा सकता है।
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