लखनऊ: एसजीपीजीआई में बीमार कर्मचारी को ही नहीं किया भर्ती, निदेशक के कहने पर शुरू हुआ इलाज
लखनऊ। एसजीपीजीआई की इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचे कर्मचारी को वहां तैनात चिकित्सक ने बिना स्ट्रेचर व परिजन के इलाज देने से मना कर दिया। हालांकि एसजीपीजीआई निदेशक के हस्ताक्षेप के बाद उसे भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है। कर्मचारी एसजीपीजीआई में तैनात है और सीने में दर्द की शिकायत होने पर इलाज …
लखनऊ। एसजीपीजीआई की इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचे कर्मचारी को वहां तैनात चिकित्सक ने बिना स्ट्रेचर व परिजन के इलाज देने से मना कर दिया। हालांकि एसजीपीजीआई निदेशक के हस्ताक्षेप के बाद उसे भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है। कर्मचारी एसजीपीजीआई में तैनात है और सीने में दर्द की शिकायत होने पर इलाज के लिए इमरजेंसी पहुंचा था।
दरअसल,एसजीपीजीआई में ड्राइवर के पद पर तैनात कृण्णपाल को अचानक सीने में दर्द होने लगा। परेशानी बढ़ने पर कृण्णपाल संस्थान की इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचते हैं, आरोप है कि इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक डॉ.के.के.सचान ने कृण्णपाल को स्ट्रेचर पर लेटकर आने को कहा है, साथ ही बिना परिजन के इलाज करने से मना कर देते है।
जब इस बात की जानकारी एसजीपीजीआई के अन्य कर्मचारियों को होती है,तो वह भी मौके पर कर्मचारी की मदद के लिए पहुंच जाते हैं। इसी बीच एसजीपीजीआई के निदेशक डॉ.आर.के.धीमान भी इमरजेंसी का राउण्ड करने पहुंच जाते हैं। कर्मचारी की समस्या देखकर निदेशक स्वयं अपने सामने मरीज का इलाज शुरू कराते हैं। देर शाम तक मरीज संस्थान की इमरजेंसी में ही भर्ती था।
एसजीपीजीआई के निदेशक डॉ.आर.के.धीमान ने बताया कि इमरजेंसी में इलाज के लिए किसी चिकित्सक ने मना नहीं किया था। मेरे सामने ही मरीज का इलाज शुरू हुआ है। एक व्यवस्था है कि जब कोई मरीज आता है तो स्ट्रेचर पर ही आता है और साथ में परिजन भी होते हैं। कर्मचारी छाती में दर्द की शिकायत लेकर अकेले पहुंच गया था। इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक ने सिर्फ इतना कहा कि स्ट्रेचर पर लेटकर आ जाइये,सिर्फ इतनी सी बात हुई है।
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