कानपुर: पोंजी घोटाले में काकादेव थाने में एक और एफआईआर, कोर्ट से धोखाधड़ी करने का किया प्रयास
कानपुर, अमृत विचार। कर्नाटक के पोंजी घोटाले में ठगी के शिकार हुए कानपुर के जूता कारोबारी ने रविवार को अब काकादेव थाने में कोर्ट से धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई है। इससे पहले कारोबारी ने मामले में काकादेव थाने में चार लोगों के खिलाफ ठगी की एफआईआर दर्ज कराई थी। कर्नाटक के पोंजी घोटाले में …
कानपुर, अमृत विचार। कर्नाटक के पोंजी घोटाले में ठगी के शिकार हुए कानपुर के जूता कारोबारी ने रविवार को अब काकादेव थाने में कोर्ट से धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई है। इससे पहले कारोबारी ने मामले में काकादेव थाने में चार लोगों के खिलाफ ठगी की एफआईआर दर्ज कराई थी।
कर्नाटक के पोंजी घोटाले में देश भर से 600 करोड़ से ज्यादा की ठगी निवेशकों से की गई थी। मामले में बंगलुरू पुलिस ने पूर्व मंत्री जनार्दन रेड्डी को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। आरोपियों ने एंबिडेंट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी खोली थी। इसके बाद चंद महीने में रुपए दोगुना करने का झांसा देकर पूरे देश भर के लोगों से ठगी की थी। कंपनी ने कानपुर के जूता कारोबारी से 3 करोड़ की ठगी की थी। जूता कारोबारी ने मामले में काकादेव थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच के बाद पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा था।
ठगों ने मामले की जांच कर रहे दरोगा से साठगांठ करके फर्जी दस्तावेज हाईकोर्ट में पेश करके जमानत लेने का प्रयास किया। मामले की जानकारी मिलने पर पीड़ित जूता कारोबारी ने अब रविवार को ठगों के खिलाफ काकादेव थाने में धोखाधड़ी की एक और एफआईआर दर्ज कराई है। एसीपी स्वरूप नगर बृजनारायण सिंह के मुताबिक कर्नाटक के पोंजी घोटाले में कानपुर काकादेव निवासी जूता कारोबारी शनि सिंह से भी तीन करोड़ रुपए की ठगी हुई थी।
डीसीपी वेस्ट की टीम ने ठगी के चार अरोपियों को शास्त्री नगर थानाक्षेत्र से हिनूर बंगलुरु निवासी फरीद अहमद, यहीं का सैय्यद अम्मार, काबलावाई सुंदरा थाना क्षेत्र डीजी हल्ली बंगलुरू निवासी सैय्यद खीजर और लिंगाराजपुरम बंगलुरु निवासी आफाक अहमद को ठगी के मामले में गिरफ्तार करके जेल भेजा था।
मामले की जांच कर रहे दरोगा मणि भूषण शुक्ला ने प्रार्थी के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर हाईकोर्ट में फर्जी एमओयू पेश किया। इतना ही नहीं विवेचक ने झूठा शपथपत्र कोर्ट में पेश किया कि आरोपियों का कोई अपराधिक इतिहास नहीं है। फर्जी एमओयू लगाकर बताया कि मामला दीवानी प्रकति का है। इसके साथ ही आरोपियों को बचाने के लिए अन्य फर्जीवाड़ा किया। मामले की जानकारी होने पर साक्ष्यों के साथ करोबारी कानपुर पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड के सामने पेश हुआ। पुलिस कमिश्नर के आदेश पर काकादेव पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज का इस्तेमाल समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
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