लाकडाउन में रोजगार छिना, अब मजबूरी छीन रही जेवर
बरेली/मुरादाबाद, महिपाल गंगवार/अविक सिंह। कोरोना महामारी के कारण दो महीने के लाकडाउन का असर आम लोगों की जिंदगी पर काफी व्यापक पड़ा है। इस दो माह में जमा पूंजी खत्म होने और रोजगार प्रभावित होने से लोग मजबूरी में गहने बेच रहे हैं। बरेली और मुरादाबाद में भी इस तरह का चलन देखने को मिला …
बरेली/मुरादाबाद, महिपाल गंगवार/अविक सिंह। कोरोना महामारी के कारण दो महीने के लाकडाउन का असर आम लोगों की जिंदगी पर काफी व्यापक पड़ा है। इस दो माह में जमा पूंजी खत्म होने और रोजगार प्रभावित होने से लोग मजबूरी में गहने बेच रहे हैं।
बरेली और मुरादाबाद में भी इस तरह का चलन देखने को मिला है। लाकडाउन में सबने मजदूरों से लेकर उद्यमियों तक की बात की। सरकार से लेकर अधिकारी, समाजसेवी सबके दिलो दिमाग में भूखे-प्यासे मजदूर रहे। इन सबके बीच में एक वर्ग ऐसा भी था जो अंदर ही अंदर घुट रहा था। उसका दर्द किसी ने महसस नहीं किया।
सरकार से लेकर प्रशासन, समाजसेवी किसी ने उस तक पहुंचने की कोशिश नहीं की। यहां बात है मध्यमवर्ग की है। तमाम ऐसे परिवार हैं जिनका रोजगार छिन गया। लेकिन इज्जत की खातिर किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। मजबूरी में पत्नियों के जेवर गिरवी रखने बाजार पहुंच गए। सर्राफा बाजार में इन दिनों ऐसे ही मध्यमवर्गीय परिवारों की भीड़ उमड़ रही है।
यह जेवर खरीदने नहीं जेवर गिरवी रखने सर्राफा बाजार पहुंच रहे हैं। इस उम्मीद के साथ कि भविष्य में जब कभी अच्छे दिन आएंगे तो जेवर को छुड़वा लेंगे। मुरादाबाद और बरेली में भी कई मध्यमवर्गीय परिवारों का यही हाल है। खाने के पैकेट लेने को लाइन में लग नहीं सकते।
बच्चों की फीस और मकान के कर्ज की किश्तें भरनी है, परिवार का पेट भी पालना है। मजबूरी में लोग जेवर गिरवी रख रहे हैं। मुरादाबाद के साहूकारों की मानें तो पिछले एक सप्ताह में जेवर के बदले कर्ज लेने वाले 100 से ज्यादा लोग आ चुके हैं। ये सभी मध्यमवर्गीय परिवार के हैं। बैंकों में भी गोल्ड लोन लेने वालों का आंकड़ा बड़ा है।
लाकडाउन में मध्यमवर्गीय तबका सबसे अधिक प्रभावित हुआ । अब जब करीब दो महीने बाद दुकानें खुलीं तो इसी मध्यमवर्गीय परिवार के लोग गहने बेचने और गिरवी रखने के लिए ज्यादा आ रहे हैं। – संदीप अग्रवाल, सर्राफ, बरेली
लाकडाउन में इस वक्त आर्थिक रूप से कमजोर लोग खासे परेशान हैं। नौकरी छूटने से लोग बेरोजगार हो गए हैं। लाकडाउन के बाद अब बाजार खुलने पर लोग जेवर बेचने ज्यादा आ रहे हैं। – विनोद वर्मा, सर्राफ, बरेली
अनलॉक-1 में जेवर गिरवी रखने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। ये सभी मध्यमवर्गीय परिवार के हैं। ये अपनी पहचान उजागर करने से साफ इनकार करते हैं। अब तक पांच-छह लोग मेरे यहां ही जेवर गिरवी रख चुके हैं। -सचिन अग्रवाल, सर्राफ, मुरादाबाद
लाकडाउन ने मध्यमवर्गीय लोगों पर आर्थिक संकट खड़ा किया है। जिससे उन्हें अपने जेवर गिरवी रखने पड़ रहे हैं। दुकानें खुलीं तो कई लोग जेवर रखने आए। जब वह रकम चुका देंगे तो अपने जेवर ले जाएंगे। – राहुल सिंघल, सर्राफ मुरादाबाद
