लखनऊ: अरबों में ‘आग’ लगाई, फिर भी ‘हवा-हवाई’, पंचायतों का वाई-फाई
अमृत विचार/ लखनऊ। ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर के जरिए हाई स्पीड इंटरनेट से जोड़ने के लिए भारतनेट परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश में दो चरण के तहत बेशुमार धनराशि पानी की तरह बहा दी गई। अरबों रुपये खर्च होने के बाद भी फेज-1 के अंतर्गत आने वाली 28,005 ग्राम पंचायतों में से मात्र 2609 …
अमृत विचार/ लखनऊ। ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर के जरिए हाई स्पीड इंटरनेट से जोड़ने के लिए भारतनेट परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश में दो चरण के तहत बेशुमार धनराशि पानी की तरह बहा दी गई। अरबों रुपये खर्च होने के बाद भी फेज-1 के अंतर्गत आने वाली 28,005 ग्राम पंचायतों में से मात्र 2609 में ही ऑप्टिकल फाइबर के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंच रहा है। ग्रामीण इलाकों में ऑप्टिकल फाइबर के जरिए हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के लिए भारत नेट परियोजना के पहले चरण में 48 जिलों की 28,005 ग्राम पंचायतों में और दूसरे चरण में 29 जिलों की 25,032 ग्राम पंचायतों का लक्ष्य रखा गया था।
फेज-1 तो कागजों में किसी तरह से पूरा कर लिया गया। लेकिन फेज-2 में अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 10736 ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर ही बिछ पाया है। वर्ष 2014 से शुरू पहले चरण में बीएसएनएल ने लगभग 40 हजार किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाकर 23 हजार रुपए कीमत के ओएनटी (ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क) लगाए गए। ओएनटी लगाने में लगभग 644,115,000 रुपए खर्च किए गए।
बदलती रही मेंटीनेंस कंपनी, ध्वस्त होती रही व्यवस्था
फेज-1 के तहत आने वाली 28,005 ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने व ओएनटी स्थापित करने के बाद भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (बीबीएनएल) ने रखरखाव का कार्य वर्ष 2017 में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को दे दिया। लेकिन बीएसएनएल का रखरखाव इतना खराब रहा कि जून 2019 में जब मात्र 410 ग्राम पंचायतें ही सक्रिय बची तो बीबीएनएल को रखरखाव का काम वापस लेना पड़ा। इसके बाद बीबीएनएल ने जुलाई 2019 में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की स्पेशल पर्पज व्हीकल कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी एसपीवी) को तीन वर्षों के लिए ऑप्टिकल फाइबर के मेंटीनेंस का काम दिया।
सीएससी ने 410 सक्रिय ग्राम पंचायतों की संख्या को 10800 तक पहुंचाया जरूर, लेकिन उसके बाद पुराना हाल हो चला। बीबीएनएल ने जुलाई 2022 में मेंटीनेंस का कार्य दिनेश इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड (डीईपीएल) को दिया है। फेज-1 के तहत पूर्वी व पश्चिमी यूपी की चयनित 28,005 ग्राम पंचायतों में से 27772 ग्राम पंचायतें ही नेशनल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएस) पर प्रदर्शित हो रही हैं। हालात इतने बदतर हैं कि एनएमएस पर पहले चरण की मात्र 2609 ग्राम पंचायतों में ही हाई स्पीड इंटरनेट की पहुंच नजर आ रही है।
2018 में शुरू हुए फेज-2 में बीएसएनएल को लगभग 39 हजार किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाकर 25,032 ग्राम पंचायतों में इंटरनेट पहुंचाना है लेकिन तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी लगभग 11 हजार ग्राम पंचायतों में ही ऑप्टिकल फाइबर बिछाने का काम पूर्ण हो पाया है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में फेज-2 में 500 ग्राम पंचायतें ही सक्रिय हैं, जहां ओएनटी तक इंटरनेट की पहुंच है।
कैसे हवा-हवाई रह गया वाई फाई
पंचायतों में लगाए गए ओएनटी तक ऑप्टिकल फाइबर के जरिए हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के बाद वाई-फाई हॉट स्पॉट (एपी) तक कनेक्टिविटी पहुंचानी थी। इन्हीं एपी के जरिए समूचे गांव में इंटरनेट पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन जब ओएनटी तक ही इंटरनेट नहीं पहुंच पाया। उस सूरत में अरबों रुपए खर्च कर ग्राम पंचायतों में सालों पहले लगाए गए एपी बेमकसद साबित हो रहे हैं। कई चरणों के तहत प्रदेश की ग्राम पंचायतों में 26855 एपी लगाने में लगभग 2,148,400,000 रुपए खर्च किए गए। एक एपी की कीमत लगभग 80 हजार रुपए है।
अब तक लगभग 2500 करोड़ रुपए हो चुके हैं खर्च
इलेक्ट्रॉनिकी और सचूना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री संजय धोत्रे की ओर से 19 मार्च 2020 को संसद में प्रस्तुत एक जवाब के अनुसार भारतनेट परियोजना के लिए बीबीएनएल उत्तर प्रदेश में 1624 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर चुका था। एक अनुमान के मुताबिक अभी तक इस परियोजना पर लगभग 2500 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
नेटवर्क को ठीक करने के लिए प्रोफेशनल एजेंसी लगा दी गई हैं। नेटवर्क को रीस्टोर करने का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो चुका है। दिसंबर तक 70 से 80 प्रतिशत नेटवर्क रीस्टोर कर लिया जाएगा। मार्च 2023 तक फेज-1 के तहत यूपी की चयनित सभी ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट की पहुंच होगी… वीपी सिंह, डायरेक्टर (ऑपरेशन) , बीबीएनएल।
यह भी पढ़ें:-Urvashi Rautela Photos : उर्वशी रौतेला ने शॉर्ट ड्रेस पहन इंटरनेट पर लगाई आग, तस्वीरें देख फैंस के छूटे पसीने
