अयोध्या: संकट बना सूखे का सर्वे, कैसे जाएगी तय समय पर 1300 गांवों की रिपोर्ट
अयोध्या, अमृत विचार । मौसम की बेरुखी से परेशान किसानों के लिए बारिश ही नहीं जिला प्रशासन का अब तक का आधा-अधूरा सर्वे भी परेशानी खड़ी कर सकता है। शासन ने सूखे के हालात पर सर्वे कराने का निर्देश देते हुए 12 सितंबर तक जनपदों से रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अयोध्या जिला प्रशासन कछुआ गति …
अयोध्या, अमृत विचार । मौसम की बेरुखी से परेशान किसानों के लिए बारिश ही नहीं जिला प्रशासन का अब तक का आधा-अधूरा सर्वे भी परेशानी खड़ी कर सकता है। शासन ने सूखे के हालात पर सर्वे कराने का निर्देश देते हुए 12 सितंबर तक जनपदों से रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अयोध्या जिला प्रशासन कछुआ गति से सर्वे करा रहा है। रिपोर्ट भेजने में दो ही दिन शेष है और अभी तक महज 250 गांवों का ही सर्वे कर फीडिंग की जा सकी है, जबकि 1300 गांवों का सर्वे कर रिपोर्ट भेजी जानी है। ऐसे में आनन-फानन में भेजी गई रिपोर्ट किसानों के लिए और भी बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है। सूखाग्रस्त जिला घोषित होने पर ही राजस्व की वसूली से राहत के साथ अन्य मदद मिल सकेगी। तीन माह में 309.4 मिमी ही बारिश होने से अन्नदाता परेशान हैं।
शासन के निर्देश पर जिला स्तरीय टीम का अध्यक्ष एडीएम वित्त एवं राजस्व को अध्यक्ष बनाया गया है। सर्वे के लिए जिला व तहसील स्तर पर 75 टीमें गठित हैं, जिसमें राजस्व विभाग, कृषि विभाग और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी शामिल हैं। गांवों में लेखपाल जा सर्वे कर ब्लॉक पर रिपोर्ट कर रहे हैं। इधर, विपक्ष भी जनपद को सूखा घोषित करने की मांग कर चुका है। किसानों को लेकर लगातार धरना प्रदर्शन व ज्ञापन देने का सिलसिला जारी है। धान लगाने वाले किसान बेहद परेशान हैं।
बीकापुर प्रतिनिधि के अनुसार बारिश और बिजली की दगाबाजी से सूखे का संकट बढ़ने लगा है। भादो का महीना सूखा बीत रहा है। धान के खेतों में दरारें बढ़ती जा रही है। धान के पौधे सूखकर खराब हो रहे हैं। मुश्किल से 7-8 घंटे बिजली मिलने और ऊपर से लो वोल्टेज रहने से सिंचाई मुश्किल हो रही है। किसान कपिल देव पाठक, अशोक, राजाराम पाल, सत्य प्रकाश यादव का कहना है कि पानी खरीद कर ट्रैक्टर से कादो कराना, ऊंची मजदूरी देकर रोपनी कराना और फिर समय-समय पर सिंचाई करना, उनके बस की बात नहीं है। इससे तो उनकी पूंजी भी नहीं निकलेगी। सरकारी नलकूप भी बंद पड़े हैं।
सोहावल प्रतिनिधि के अनुसार सूखे की चपेट में आये किसानों को ईश्वरीय कोप के साथ साथ अघोषित बिजली कटौती से भी परेशान हैं। क्षेत्रीय किसान भगवान प्रसाद पांडेय, राजेश गोस्वामी, देवेंद्र यादव, लल्लन यादव, राजकुमार यादव ,योगेंद्र प्रताप सिंह फौजी, मनोज कुमार सिंह के अनुसार विगत एक वर्षों से किसान मानसून के कहर का शिकार हो रहै हैं। इस सत्र मे सूखे की आपदा से 1429 की फसली धान की बर्बादी स्पष्ट दिखाई दे रही है।
बोले किसान
पूराबाजार के मोहतशिमपुर के किसान पिंटू वर्मा कहते हैं कि सूखे की हालत में फसलों की सिंचाई अब कर पाना संभव नहीं है। डीजल की महंगाई विद्युत की कटौती दोनों अब भारी पड़ रही है।
पूराबाजार के सराय चैमल के राम अजोर वर्मा कहते हैं कि नहर में पानी नहीं आ रहा है। ऊपर से विद्युत कटौती चल रही है। धान और गन्ने की फसल सिंचाई नुकसान होने के कगार पर पहुंच गई है।
बोले जिम्मेदार
शासन के निर्देश पर सूखे के लिए सर्वे कराया जा रहा है। गांव-गांव में टीमें लगी हुई हैं। हर हाल में 12 तक रिपोर्ट चली जाएगी। अब तक 250 गांवों की सर्वे रिपोर्ट फीड हो चुकी है।
– महेंद्र सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व
बारिश का रिकॉर्ड
जून से अब तक तीन महीने में महज 309.4 मिमी ही बारिश हुई है। औसतन 879.5 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। बारिश न होने के कारण फसलों पर संकट गहराया है।
– डॉ. सीताराम मिश्र, मौसम वैज्ञानिक, नरेंद्र देव कृषि विवि
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