बरेली: रोडवेज बस अड्डे की व्यवस्थाएं हुईं बेहाल, शिशु देखभाल कक्ष में ताले तो व्हीलचेयर जंजीरों में जकड़ी
बरेली, अमृत विचार। परिवहन निगम के अधिकारी रोडवेज बस अड्डे की व्यवस्थाएं सुधारने में रूचि नहीं ले रहे हैं। शहर के पुराने रोडवेज बस अड्डे की हालत खराब है, यहां यात्री रोजाना परेशान हो रहे हैं, लेकिन अव्यवस्थाएं दूर नहीं हो रही हैं। इससे महिला यात्रियों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। अड्डे पर शिशु …
बरेली, अमृत विचार। परिवहन निगम के अधिकारी रोडवेज बस अड्डे की व्यवस्थाएं सुधारने में रूचि नहीं ले रहे हैं। शहर के पुराने रोडवेज बस अड्डे की हालत खराब है, यहां यात्री रोजाना परेशान हो रहे हैं, लेकिन अव्यवस्थाएं दूर नहीं हो रही हैं। इससे महिला यात्रियों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।

अड्डे पर शिशु देखभाल कक्ष में ताले लटके हैं। ऐसी स्थिति में महिला यात्री बच्चों को कहां दूध पिलाएं, उनके सामने यह बड़ा संकट बना है। दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधा के तौर पर रखी जाने वाली व्हीलचेयर तक जंजीरों में जकड़ी रहती है। पुराने रोडवेज बस अड्डे पर अव्यवस्थाओं का अंबार है। जिम्मेदार अधिकारी उस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दे रहे हैं।

जाने वाली बसों की जानकारी देने के लिए लगाई एलईडी भी बंद पड़ी हैं। यात्रियों से हर माह लाखों रुपये की कमाई करने वाले परिवहन निगम बेहतर सुविधा देने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है। रविवार की दोपहर में अमृत विचार की टीम ने पुराने रोडवेज बस अड्डे की स्थिति परखी तो हालात बेहद खराब मिले।

बस अड्डे पर बिजली के खुले हुए तार हादसे को दावत दे रहे हैं। शासन के निर्देश पर बस अड्डे पर महिला यात्रियों की सहूलियत के लिए बना शिशु देखभाल कक्ष में भी ताला लगा मिला। बस अड्डे पर कई जगह पंखे नहीं होने से यात्री गर्मी में परेशान होते हैं। लगातार सफाई नहीं होने से यात्री कूड़े के ढेर के पास बैठे थे।
बंदरों के हमले का डर
पुराने बस अड्डा पर इन दिनों लोग बंदरों के उत्पात से परेशान हैं। बंदर बस अड्डे पर कभी लोगों के हाथ से सामान लेकर भाग जाते हैं तो कभी यात्रियों पर हमला कर देते हैं। कई यात्रियों को बंदर घायल भी कर चुके हैं।

आलम यह है कि यहां आने जाने वाले लोग बंदरों से डरे हुए हैं। बस अड्डे पर बंदरों के आतंक के कारण यात्रियों व दुकानदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

महिलाओं के कहने पर शिशु देखभाल कक्ष को खोल दिया जाता है। जबकि दिव्यांग यात्रियों के आने पर उसे व्हीलचेयर भी मुहैया कराई जाती है। हमेशा ताला खुला रखने पर उसमें पुरुष भी जाकर बैठ जाते हैं और जो कमियां हैं उन्हें भी दूर कराया जाएगा—आरके त्रिपाठी, आरएम बरेली रीजन।
यह भी पढ़ें- बरेली: शराबी ने पिता की गोद से बच्ची को खींचकर की अश्लील हरकत, रिपोर्ट दर्ज
