पीलीभीत: दरिंदों ने किशोरी को जलाया, गिरफ्तारी कर पुलिस ने गुडवर्क बताया
पीलीभीत, अमृत विचार। पुलिस क्राइम कंटोल और महिला संबंधी मामलों में सख्ती बरतने का दावा करती है। मगर, हाल ही में दो दलित किशोरियों से दुष्कर्म के मामले में जिसमें एक किशोरी को जिंदा तक जला दिया गया। जिसमें पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई। इसके बावजूद अधिकारी मातहतों पर शिकंजा कसने के बजाए बचाव …
पीलीभीत, अमृत विचार। पुलिस क्राइम कंटोल और महिला संबंधी मामलों में सख्ती बरतने का दावा करती है। मगर, हाल ही में दो दलित किशोरियों से दुष्कर्म के मामले में जिसमें एक किशोरी को जिंदा तक जला दिया गया। जिसमें पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई। इसके बावजूद अधिकारी मातहतों पर शिकंजा कसने के बजाए बचाव करते दिखाई दिए। खास बात तो यह है कि दरिंदों ने दिनदहाड़े दुष्कर्म करने के बाद किशोरी को जिंदा जलाया और माधोटांडा पुलिस दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी करते हुए इस संगीन वारदात में गुडवर्क गिनाती रही।
माधोटांडा पुलिस का महिला अपराध को लेकर यह कोई पहला मामला नहीं है, जब लापरवाही उजागर हुई हो। इससे पहले एक महिला ने जेठ से हुए विवाद के बाद पुलिस प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए जहर खा लिया था। उसने आरोप लगाए थे कि जब वह शिकायत करने गई तो इंस्पेक्टर ने अभद्र भाषा का प्रयोग कर भगा दिया था। इस मामले को जैसे-तैसे मैनेज कर दिया गया। किशोरी को दुष्कर्म के बाद जलाने के मामले में भी थाना पुलिस को तीन दिन तक सूचना न लग पाना पुलिस की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है।
मगर, एक बड़े अफसर के गुडमैन होने के चलते इस बार भी माधोटांडा पुलिस खुद को जांच की आंच से भी बचा ले गई। इसी तरह से एक अन्य मामला जहानाबाद क्षेत्र से सामने आया था। इसमें भी दलित किशोरी से दो शोहदों ने अगवा कर खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया। आरोप है कि दिन भर पुलिस जांच के नाम पर मामला दबाए रही। उसके बाद देर शाम पिता की तहरीर पर कार्रवाई करते हुए एक आरोपी की गिरफ्तारी की गई और माधोटांडा कांड की तर्ज पर इसे भी पुलिस ने गुडवर्क ही गिना डाला। मातहतों की लापरवाही को जिम्मेदार नजर अंदाज कर गए।
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