पीलीभीत में चींटियों में लिटाया, लखनऊ में भी नहीं मिल पा रही सुविधाएं
पीलीभीत, अमृत विचार। दलित किशोरी को दरिंदगी के बाद जिंदा जलाने के मामले में पुलिस की लापरवाही के साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं की भी पोल खुलती जा रही है। पीलीभीत से गंभीर हालत में रेफर किये जाने के बाद लखनऊ पहुंचने के बाद भी परिवार की मुश्किल कम नहीं हो सकी है। उन्हें कोई सुविधा …
पीलीभीत, अमृत विचार। दलित किशोरी को दरिंदगी के बाद जिंदा जलाने के मामले में पुलिस की लापरवाही के साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं की भी पोल खुलती जा रही है। पीलीभीत से गंभीर हालत में रेफर किये जाने के बाद लखनऊ पहुंचने के बाद भी परिवार की मुश्किल कम नहीं हो सकी है। उन्हें कोई सुविधा नहीं मिल पा रही। वहीं इलाज का खर्च भी चुनौती बन गया है। ऐसे में मुख्यमंत्री से पिता ने मदद की गुहार लगाई है।
बता दें कि पीड़िता के परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण किया जाता है। इसी बीच परिवार पर आई इस विपत्ति ने सभी को परेशान कर दिया है। किशोरी को सात सितंबर से लेकर 11 सितंबर तक जिला अस्पताल रखा गया था। जिला अस्पताल के बर्न वार्ड की सुविधाएं किसी से छिपी नहीं। रविवार को रेफर किये जाने के चंद मिनट पहले ही जब पूर्व राज्यमंत्री हेमराज वर्मा पॅहुचे थे। उस वक़्त पीड़ित के बैड पर चीटियों के झुंड थे। जिस पर पूर्व राज्यमंत्री बिफर भी गए थे।
अब गंभीर रूप से झुलसी किशोरी लखनऊ में इलाज करा रही है। बताते है कि वहां भी उसे सम्भव इलाज और सहायता नहीं मिल पा रही। परिवार के पास बेटी का इलाज कराने के लिए पर्याप्त रुपये भी नहीं हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई है। स्वास्थ्य विभाग की अव्यवस्था का यह मामला सोशल मीडिया पर भी फ़ज़ीहत कराता रहा।
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