ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष ने बयान में कहा- मंदिर-मस्जिद से ज्यादा जरूरी है आपसी सौहार्द
लखनऊ। सबको हक है अपनी –अपनी आस्था के हिसाब से पूजा पाठ करने का, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि 250 साल पहले मुगल सल्तनत के दौर में धार्मिक स्थल पर लोग अपने –अपने तरीके से इबादत करते थे,उस समय क्या सही था क्या गलत था वह इतिहास के पन्नों में गायब हो गया। …
लखनऊ। सबको हक है अपनी –अपनी आस्था के हिसाब से पूजा पाठ करने का, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि 250 साल पहले मुगल सल्तनत के दौर में धार्मिक स्थल पर लोग अपने –अपने तरीके से इबादत करते थे,उस समय क्या सही था क्या गलत था वह इतिहास के पन्नों में गायब हो गया।
हमारी विचारधार उदारवादी होनी चाहिए, मंदिर मस्जिद से ज्यादा बड़ी इबादत है आपसी सौहार्द और सद्भावना। यह कहना है ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल ला बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर का। उन्होंने यह बातें ज्ञानवापी मस्जिद मामले पर कही है। उन्होंने कहा कि सदभावना से ही हमारे देश की पहचान है पूरी दुनिया में, यही आध्यात्मवाद को बढ़ाती है।
उन्होंने कहा कि मंदिर मस्जिद के नाम पर किसी भी इंसान का खून बहे, तो वह इबादत कबूल नहीं होती, यह पाप होता है। 1991 के कानून को देखा जाये तो यह विवाद बहुत ज्यादा तूल पकड़ता है, ऐसे में हमें जरूरत है कि लोग आपसी सौहार्द के साथ कार्य करें,जिससे इंसानियत जिंदा रहे।
इंसानियत की हिफाजत करना ही असली इबादत है। उन्होंने कहा कि हमारे देश की महिलायें देवी का रूप है और यहां की धरती हमारी मातृभूमि, मातृभूमि आध्यात्म को बढ़ाती है, इसकी रक्षा हम सभी को मिल कर करनी होगी।
