रामपुर : ‘अजब अदा है हमारी, अजीब लोग हैं हम…’, शायरों ने कलाम पेश कर लूटी वाहवाही

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रामपुर,अमृत विचार। सौलत पब्लिक लाइब्रेरी के 88वें स्थापना दिवस पर हुए मुशायरे में स्थानीय एवं दूर-दराज से आए शायरों ने कलाम पेश कर खूब वाह-वाही लूटी। मुशायरे की शमा लाइब्रेरी के चेयरमैन डॉ. महमूद अहमद खां ने रौशन की। इस मौके पर चेयरमैन ने कहा कि लाइब्रेरी में रखी पांडुलिपियों का डिजिटलाइजेशन कराया जाएगा। ताकि,दूर-दराज …

रामपुर,अमृत विचार। सौलत पब्लिक लाइब्रेरी के 88वें स्थापना दिवस पर हुए मुशायरे में स्थानीय एवं दूर-दराज से आए शायरों ने कलाम पेश कर खूब वाह-वाही लूटी। मुशायरे की शमा लाइब्रेरी के चेयरमैन डॉ. महमूद अहमद खां ने रौशन की। इस मौके पर चेयरमैन ने कहा कि लाइब्रेरी में रखी पांडुलिपियों का डिजिटलाइजेशन कराया जाएगा। ताकि,दूर-दराज के लोग भी पांडुलिपियों का अवलोकन ज्ञान प्राप्त कर सकें।

मेहमाने खुसूसी डॉ. तनवीर अहमद खां और विशिष्ट अतिथि सेवा निवृत्त ज़िला न्यायाधीश तनवीर अहमद वस्फी, पूर्व क्षेत्रीय डायरेक्टर उच्च शिक्षा डॉ. मुमताज़ अर्शी, मारूफ शायर अज़हर इनायती, शकील गौस और डॉ. ज़हीर रहमती मौजूद रहे। मुशायरे के संयोजक उस्ताद शायर फरीद शमसी ने सभी मेहमान शायरों का इस्तकबाल किया।

सौलत पब्लिक लाइब्रेरी के सचिव मौहम्मद मुस्लिम गाज़ी ने मुख्य अतिथि को दोशाला और स्मृति चिन्ह भेंट किया, जबकि मजलिस माशावरत के सदस्यों ने अतिथि शायरों को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। मुशायरे की निजामत कर रहे डा. मुजाहिद फराज ने नात-ए-पाक पेश करने के लिए सैयद नवेद कैसर को दावते सुखन दी। इसके बाद प्रसिद्ध शायर अजहर इनायती को इस शेर पर खूब वाहवाही मिली- अजब अदा है हमारी, अजीब लोग हैं हम…घड़ी भी वक्त को अपने गंवा के देखते हैं। तनवीर वसफी ने कहा- अजब है मरहला यारो तिलिस्म नारसाई का-जो टूटेगा ये सन्नाटा तो जाऊंगा बिखर मैं भी। निखत अमरोहवी ने अपनी मखमली आवाज में जब यह शेर पेश किया तो खूब वाहवाही मिली- आप से हम न बोलेंगे हरगिज़-जाइए आप से हम खफा हैं।

डा. मुजाहिद फराज का यह शेर बहुत पसंद किया गया- मोहब्बत के समुंदर के लिए छोटी है दुनिया-लड़ाई के लिए घर में फकत एक भाई काफी है। नईम नजमी के इस शेर को काफी पसंद किया गया- यार ऐसी तो मेरे दिल पे कयामत मत कर-तुझसे ये किसने कहा है मोहब्बत मत कर। खुशबू रामपुरी ने कहा-गम से घबरा के अगर मौत का साया मांगा- जिस्म ने रूह से रहने का किराया मांगा। मुरादाबाद से आए कशिश वारसी ने कहा- आप को हम से अदावत है बहुत-ग़ालिबन हम में शराफत है बहुत।

डा. जहीर रहमती ने कहा- एक दौर था कि जर्रा बराबर नहीं था वह- अब कोई इस के जर्रा बराबर नहीं रहा। निखत मुरादाबादी ने कहा- जो तू चाहे कि लोगों के दिलो में हो अदब तेरा-तेरे लहजे में भी कुछ सादगी होना चाहिए। अजीज बकाई ने कहा-धड़कने लगा जब से इन के लिए-ये बेकार दिल काम का हो गया।

इनके अलावा डा. मुमताज़ अर्शी, शकील गौस , हस्सान आफंदी,डा. अलिफ नाजिम, फरीद शम्सी, आज़र नोमानी, आले अहमद सुरूर , हक रामपुरी, अदनान ज़ियाई, नवेद क़ैसर, डा. मोहिद्दीन गुलफाम और कमाल अख्तर कमाल ने भी अपने कलाम पेश किए। इस मौके पर मौलाना मोहम्मद असलम जावेद कासमी, डा. सैयद अनवारुल हसन, डा. सैयद जाफर शाह, डा. मेहंदी हसन, जीशान मुहम्मद खान मुराद,सैयद मुजतबा नदीम, फहीमा बी,मसूद अख्तर खां, सय्यद जफर अली एडवोकेट, जाहिद खान और डा. इरशाद नोगानवीं, दानिश खां मेंबर, फर्रुख नईम पप्पू,परवेज निज़ामी, मिर्ज़ा जमशेद आगा, रिज़वान अहमद सिद्दीकी, महफूज अहमद कादरी, मजहर मोईन खां, शहजादा रिज़वान खां समेत काफी लोग मौजूद रहे।

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