बरेली: 82 वर्षों से निरंतर चल रही है सुभाष नगर की रामलीला, जानें क्या है खासियत
बरेली, अमृत विचार। पारंपरिक रामलीला में अब कई तरह के आधुनिक बदलाव दिख रहे हैं। सुभाष नगर में वर्ष 1939 यानी 82 सालों से निरंतर होने वाली रामलीला के कलाकारों ने कोई आधुनिक बदलाव नहीं किया है। राम व रामायण के भक्तों की आस्था इस रामलीला को लेकर गजब की देखने को मिलती है। 22 …
बरेली, अमृत विचार। पारंपरिक रामलीला में अब कई तरह के आधुनिक बदलाव दिख रहे हैं। सुभाष नगर में वर्ष 1939 यानी 82 सालों से निरंतर होने वाली रामलीला के कलाकारों ने कोई आधुनिक बदलाव नहीं किया है। राम व रामायण के भक्तों की आस्था इस रामलीला को लेकर गजब की देखने को मिलती है। 22 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चलने वाली रामलीला की तैयारियां शुरू हो गईं हैं।
लालटेन की रोशनी और तखत के मंच से शुरू हुई थी रामलीला
रामलीला सभा के डायरेक्टर अखिलेश सिंह बताते हैं कि शुरुआती दिनों में उनके बुजुर्गों ने आठ दशक पूर्व रामलीला की शुरुआत की थी। तब वर्तमान की तरह इतनी आधुनिक सुविधाएं नहीं थीं। ऐसे में राम की लीला का मंचन करने के लिए आपसी सहयोग से लोग पूरी रामलीला का मंचन किया करते थे। तब घरों से कई सारे तखत, चादर और रोशनी के लिए लालटेन एकत्र कर मंच तैयार किया जाता था। तब भी श्रवण कुमार के नाटक से ही रामलीला की शुरुआत होती थी। जो वर्तमान में भी है।
नाटक में दशरथ को श्राप मिलता है, उसके बाद नारद मोह का मंचन होता है और विष्णु को श्राप मिलता है। उसके बाद रामलीला की शुरुआत होती है। हालांकि तब से अब तक मंच सज्जा, संगीत, लाइट, साउंड, परिधान व अन्य व्यवस्थाओं में कई आधुनिक बदलाव हुए हैं, लेकिन, कलाकारों के संवाद, पटकथा, रूपरेखा और शैली में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है।
पढ़ाई व नौकरी करने वाले कलाकारों से सजती है रामलीला
सुभाष नगर रामलीला में करीब 60 कलाकार रामायण के विभिन्न पात्रों की भूमिका अदा करते हैं। इनमें से ज्यादातर लोग बैंक, फार्मा, मेडिकल समेत कई सरकारी नौकरियों में हैं। पूरी रामलीला में एक भी कलाकार बाहर के नहीं बुलाए जाते। वानर सेना में 10वीं व 12वीं तक के छात्र भी भाग लेते हैं। बीटेक, मेडिकल आदि की पढ़ाई करने वाले युवा भी राम सहित कई पात्रों की बेहतरीन अदाकारी करते हैं।
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