रायबरेली: सब्जियों पर आफत बनकर बरसा पानी, किसान हुए तबाह
रायबरेली, अमृत विचार। सब्जी की खेती से अपनी जीविका चलाने वाले छोटे किसानों को बरसात ने तबाह कर दिया है। विगत कई दिनो से हो रही बरसात सब्जियों पर आफत बनकर आई है। कई बीघे सब्जियां बरसात से नष्ट हो गई है। जिले के ऊंचाहार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सब्जियों का उत्पादन होता है। …
रायबरेली, अमृत विचार। सब्जी की खेती से अपनी जीविका चलाने वाले छोटे किसानों को बरसात ने तबाह कर दिया है। विगत कई दिनो से हो रही बरसात सब्जियों पर आफत बनकर आई है। कई बीघे सब्जियां बरसात से नष्ट हो गई है।
जिले के ऊंचाहार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सब्जियों का उत्पादन होता है। ऊंचाहार में पैदा होने वाली सब्जियां न सिर्फ जिले की विभिन्न मंडियों में पहुंचती है , अपितु जिला मुख्यालय की मंडी में भी ऊंचाहार की सब्जियों में बड़ी खपत होती है।विगत कई दिनो से रुक रुक कर हो रही बरसात ने जहां एक ओर धान की फसल के लिए संजीवनी बनकर आई है , वही दुसरी ओर दूसरी फसलों के लिए ये आफत की बरसात हुई है। उर्द ,मूंग , अरहर , तोइया की फसल को नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान सब्जियों को हुआ है।
आम तौर पर किसान भादों महीने के अंत में कच्चे आलू की फसल बो देते हैं। ये फसल सर्दी शुरू होते ही मंडी में पहुंच जाती है। जिन्हे आम भाषा में कच्चा आलू कहा जाता है। इसी के साथ भादों महीने में ही किसान गोभी , मूली , हरी धनिया की बोआई करते हैं। इस बार विलंब से हुई बरसात ने सब्जी की सारी फसलों को नष्ट कर दिया है। गोभी के पौधे खेतों में पानी से सड़ गए है तो आलू भी खेतों में सड़ चुका है। जिसका असर किसान के साथ साथ खरीदारों आए उपभोक्ताओं पर पड़ा है। एक तरफ जहां किसान तबाह हो गए है , वहीं दूसरी ओर मंडियों में सब्जियों के दाम उपभोक्ताओं को रुला रहे हैं।
इन गांव के किसानों पर पड़ा असर
ऊंचाहार क्षेत्र के गांव रैयापुर, त्रिभुवन का पुरवा , शहजादपुर ,मठ , पट्टी आदि गांवों के सैकड़ों किसानों की जीविका सब्जी की खेती पर निर्भर है। कम जोत के छोटे किसान सब्जियों का उत्पादन करके अपनी साल भर की जीविका चलाते हैं। भूमि कम होने के कारण वह कोई दूसरी फसल नहीं बोते हैं। बरसात से नष्ट हुई सब्जी से किसानों को लाखों रुपए की चपत लगी हैं, साथ ही उनका उत्पाद भी खत्म हो गया है। रैयापुर गांव के किसान अजयपाल, देवता दीन, परशुराम पासवान,जगजीवन मौर्य , ननकू मौर्य , संजय पाल आदि ने बताया कि उनके सामने जीविका का संकट पैदा हो गया है। उनकी संजियों की फसल में विशेषकर गोभी तैयार होने के कगार पर थी।
