बरेली: आराम के लिए डाली गईं कुर्सियां दे रहीं कोरोना को दावत
पीयूष दुबे, बरेली। शहर के 300 बेड अस्पताल में कोरोना संदिग्धों को जांच से पहले जिन कुर्सियों पर बैठाया जा रहा है, उनसे उनके संक्रमित होने का खतरा बढ़ रहा है। हैरत की बात यह है कि स्वास्थ्य महकमे के आलाधिकारियों ने इस अहम बिंदु की ओर ध्यान देने की जहमत भी नहीं उठाई। ऐसे …
पीयूष दुबे, बरेली। शहर के 300 बेड अस्पताल में कोरोना संदिग्धों को जांच से पहले जिन कुर्सियों पर बैठाया जा रहा है, उनसे उनके संक्रमित होने का खतरा बढ़ रहा है। हैरत की बात यह है कि स्वास्थ्य महकमे के आलाधिकारियों ने इस अहम बिंदु की ओर ध्यान देने की जहमत भी नहीं उठाई। ऐसे में यह आराम कुर्सी कहीं उनकी जान पर भारी न पड़ जाए।
300 बेड अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती करने के साथ ही वहां पर संदिग्धों के सैंपल लेकर उनकी जांच भी कराई जा रही है। इससे वहां पर रोजाना बड़ी संख्या में संक्रमितों का आना-जाना लगा रहता है। रविवार को भी सैकड़ों की संख्या में पहुंचे कोरोना संदिग्धों को अस्पताल परिसर में गोला बनाकर रखी गईं कुर्सियों पर बैठाया गया। उन्हीं कुर्सियों पर बारी-बारी से संक्रमित भी बैठते हैं। इससे जिसे संक्रमण न हो, उसके भी संक्रमित होने का खतरा बना रहता है। कोरोना संदिग्धों को सुविधा देने की नीयत से किया गया स्वास्थ्य विभाग का यह कार्य उनकी जान के लिए भी खतरा बन रहा है।
विशेषज्ञ की बात
इस बारे में एक विशेषज्ञ डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोरोना संक्रमण प्लास्टिक पर तीन से 24 घंटे तक प्रभावी रहता है। कुर्सी संक्रमित तभी होगी, जब कोई संक्रमित व्यक्ति उस पर कम से कम 15 से 20 मिनट तक बैठे और उसके हाथ या अन्य कोई अंग कुर्सी में स्पर्श करें। कुर्सी पर बैठने वाला संक्रमित व्यक्ति अगर पूरे कपड़े पहने है और उसके कपड़े संक्रमित नहीं हैं तो संक्रमण फैलने का खतरा कम रहता है।
आगंतुकों की आराम के लिए रखीं कुर्सियां
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विनीत शुक्ल का कहना है कि 300 बेड अस्पताल में कुर्सियां रखकर गोले बनाने का उद्देश्य यह था कि वहां पर आने वाले लोगों को सुविधा हो सके। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जा सके। कुर्सियों को सैनेटाइज भी कराया जाता है। अब यह बदलाव करेंगे कि एक कुर्सी पर जो बैठे, उसे उठकर दूसरी कुर्सी पर न बैठना पड़े। नंबर आने पर सीधा सैंपल दे और घर लौट जाए।
