कानपुर मेट्रो में गुजरात से शामिल होने पहुंची आठवीं ट्रेन
कानपुर, अमृत विचार। शहर में मेट्रो का कारवां लगातार बढ़ रहा है। गुजरात से तीन डिब्बों की एक और ट्रेन कानपुर मेट्रो के बेड़े में शामिल होने शहर पहुंच गई है। सावली प्लांट में तैयार की गई ट्रेन 18 सितंबर को वहां से रवाना की गई थी, जो सामवार भोर पहर गुरुदेव चौराहा स्थित मेट्रो …
कानपुर, अमृत विचार। शहर में मेट्रो का कारवां लगातार बढ़ रहा है। गुजरात से तीन डिब्बों की एक और ट्रेन कानपुर मेट्रो के बेड़े में शामिल होने शहर पहुंच गई है। सावली प्लांट में तैयार की गई ट्रेन 18 सितंबर को वहां से रवाना की गई थी, जो सामवार भोर पहर गुरुदेव चौराहा स्थित मेट्रो डिपो में पहुंच गई। मेट्रो के दो कॉरिडोर को मिलाकर शहर में कुल 39 मेट्रो ट्रेनों को संचालन किया जाना है।
मेक इन इंडिया के तहत बनी
कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के अंतर्गत प्राथमिक सेक्शन आईआईटी से मोतीझील के बीच मेट्रो का संचालन हो रहा है। यहां चलने वाली सभी मेट्रो की ट्रेनें पूरी तरह से मेक इन इंडिया के तहत बनी हैं। जिन्हें निर्माता कंपनी मेसर्स ऐल्सटॉम इंडिया के सावली (गुजरात) प्लांट में तैयार किया जा रहा है।
पूरी तरह से हाइटेक है ट्रेन
इन ट्रेनों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग का फीचर है जिसकी मदद से ट्रेनों में लगने वाले ब्रेक्स के माध्यम से ऊर्जा को रीजेनरेट कर फिर से सिस्टम में इस्तेमाल कर लिया जाता है। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इन ट्रेनों में अत्याधुनिक प्रॉपल्सन सिस्टम भी लगा है। इन ट्रेनों में कार्बन-डाई-ऑक्साइड सेंसर आधारित एयर कंडीशनिंग सिस्टम है जो ट्रेन में मौजूद यात्रियों की संख्या के हिसाब से चलता और ऊर्जा की बचत करता है। साथ ही टॉक बैक बटन भी है जिसे दबाकर यात्री इमरजेंसी में ट्रेन ऑपरेटर से बात कर सकते हैं। यात्री की लोकेशन और सीसीटीवी का फुटेज सीधे ट्रेन ऑपरेटर के पास मौजूद मॉनीटर पर दिखाई देता है।
90 किमी. प्रति घंटा मेट्रो की स्पीड
कानपुर मेट्रो ट्रेनों की डिजाइन स्पीड 90 किमी./घंटा है। ट्रेनों की यात्री क्षमता 974 है। इन ट्रेन के पहले और आखिरी कोच में दिव्यांगों की व्हीलचेयर के लिए अलग से जगह है। व्हीलचेयर के स्थान के पास लॉन्ग स्टॉप रिक्वेस्ट बटन है जिसे दबाकर दिव्यांग ट्रेन ऑपरेटर को अधिक देर तक दरवाजा खुला रखने के लिए सूचित कर सकते हैं, ताकि वे आराम से ट्रेन से उतर सकें।
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