नो इफ..नो बट..ओनली सच: खत्म हो जाएगा अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय!, सच्चाई सरकार ने ही बता दी

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर स्पष्टीकरण जारी किया है जिनमें दावा किया जा रहा है कि सरकार अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को खत्म कर उसका विलय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय में कर सकती है। सरकार ने कहा, यह दावा फर्ज़ी है…ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। गौरतलब है, 2006 में …

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर स्पष्टीकरण जारी किया है जिनमें दावा किया जा रहा है कि सरकार अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को खत्म कर उसका विलय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय में कर सकती है। सरकार ने कहा, यह दावा फर्ज़ी है…ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। गौरतलब है, 2006 में अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय बनाया गया था।

रिपोर्ट का कहना है कि भाजपा की अगुवाई में एनडीए सरकार का मानना है कि अल्पसंख्यक मामलों के लिए एक स्वतंत्र मंत्रालय की कोई जरूरत नहीं है। उनका मानना है कि यूपीए की मनमोहन सरकार ने तुष्टिकरण की राजनीति के कारण वर्ष 2006 में एक अलग मंत्रालय का गठन किया था।

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इस मामले में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि मंत्रालय को खत्‍म करके मोदी सरकार समाज को बांटने का प्रयास कर रही है। उन्‍होंने कहा, बीती मनमोहन सरकार का इसके लिए अगल मंत्रालय बनाने का उद्देश्य अल्पसंख्यकों को सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं से जोड़कर मुख्यधारा में शामिल करना था। वहीं अब भाजपा सरकार राजनीतिक लाभ को लेकर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हर मौके का उपयोग कर रही है।

इस मामले में पीआईबी फैक्ट चेक टीम ने पड़ताल की, तो पाया कि यह सूचना पूरी तरह से फर्जी हैं। इस तरह का कोई प्रस्ताव केंद्र सरकार द्वारा नहीं दिया गया है। यह सूचना पूरी तरह से फर्जी बताई गई है। पीआईबी का कहना है कि यह खबरें समाज में भाईचारे को खत्म करती हैं। इससे देश का माहौल खराब होता है।

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