लखनऊ: राजधानी के बीआरडी अस्पताल में चिकित्सकों की कमी का मरीजों पर पड़ रहा असर
लखनऊ। राजधानी के महानगर स्थित भाऊराव देवरस अस्पताल (बीआरडी) में चिकित्सकों की भारी किल्लत है। जिसका सीधा असर मरीजों के इलाज व जांच पर पड़ रहा है। हालात यह है कि चिकित्सकों को दिन में ओपीडी व रात में इमरजेंसी करनी पड़ रही है। लेकिन चिकित्सकों के ऊपर एक से अधिक काम की जिम्मेदारियां भी …
लखनऊ। राजधानी के महानगर स्थित भाऊराव देवरस अस्पताल (बीआरडी) में चिकित्सकों की भारी किल्लत है। जिसका सीधा असर मरीजों के इलाज व जांच पर पड़ रहा है। हालात यह है कि चिकित्सकों को दिन में ओपीडी व रात में इमरजेंसी करनी पड़ रही है। लेकिन चिकित्सकों के ऊपर एक से अधिक काम की जिम्मेदारियां भी समस्या का सबब बनती दिखाई पड़ती है।
ट्रांस गोमती क्षेत्र में महज एक राजकीय अस्पताल होने से मरीज भारी संख्या में इस अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते है। लेकिन अस्पताल में फिजीशियन, रेडियोलॉजिस्ट, हड्डी रोग, बेहोशी के चिकित्सक न होने से अल्ट्रासांउण्ड जांच होना तो दूर की बात,सामान्य मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।

कई मरीजों को अल्ट्रासाउण्ड जांच की जरूरत होने पर हजरतगंज स्थित सिविल अस्पताल भेजे जाने की बात बताई जाती है। इसके अलावा बेहोशी के चिकित्सक न होने से सर्जरी भी नहीं हो रही है। हालात इतने खराब है कि फिजीशियन न होने से मौसमी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को भी दूसरे अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है।
करीब 60 बेड के इस अस्पताल में मौजूदा समय में कुल सात चिकित्सक अपनी सेवायें दे रहें। सीएमएस डॉ.आर सी सिंह खुद मानते हैं कि यह दिक्कत काफी बड़ी है,लेकिन उनके हाथ में कुछ नहीं है। फिर भी वह मरीजों को जितनी सुविधा दे सकते हैं दे रहे हैं।
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