दशहरा मेला : विरासत में पूर्वजों से मिले हुनर से भाईचारे का संदेश दे रहा राजू फकीरा

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

अमृत विचार, लखनऊ। नजाकत, नफासत अदब और तहजीब का शहर हमेशा से लोगों को आपसी भाईचारा कायम करने का पैगाम देता आया है। हर साल दशहरे में इसकी झलक लखनऊ के ऐशबाग स्थित रामलीला मैदान में दिखाई पड़ती है। जहां मोहर्रम में ताजिया बनाने वाले कारीगर राजू फकीरा लंकेश का पुतला बनाकर एकता और भाईचारे …

अमृत विचार, लखनऊ। नजाकत, नफासत अदब और तहजीब का शहर हमेशा से लोगों को आपसी भाईचारा कायम करने का पैगाम देता आया है। हर साल दशहरे में इसकी झलक लखनऊ के ऐशबाग स्थित रामलीला मैदान में दिखाई पड़ती है।

जहां मोहर्रम में ताजिया बनाने वाले कारीगर राजू फकीरा लंकेश का पुतला बनाकर एकता और भाईचारे का संदेश दे रहे हैं। वह विरासत में पूर्वजों से मिले हुनर को आगे बढ़ा रहे हैं। रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों की मानें तो करीब 400 साल पहले ऐशबाग में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के प्रसंगों को लेकर रामलीला का मंचन शुरू किया गया था।

उस वक्त रावण दहन के लिए जिस समुदाय ने लंकेश का पुतला बनाया था। उसी परिवार की पांचवी पीढ़ी राजू फकीरा है। जोकि इस नई थीम के साथ दशानन का पुतला बना रहे हैं।

राजू फकीरा के मुताबिक, उनके पिता फकीरा दास, बाबा मक्कादास, दादा नरायणदास ऐशबाग रामलीला मैदान में लंकेश का पुतला बनाने का कार्य कर रहे हैं। पुतले का निर्माण कार्य उनके पूर्वजों से शुरू किया था। बताया कि उस वक्त पेड़ की पतली टहनियों से बेजोड़ पुतला तैयार किया जाता था।

बेगम हजरत महल पार्क में दशहरे पर वह दशानन का पुतला बना चुके हैं। उन्होंने बताया कि लंकेश का पुतला बनने से पहले वह औजारों की पूजा करते हैं। इसके बाद उनके सहयोगी पुतला निर्माण शुरू करते हैं। लंकेश का ढांचा तैयार होने पर रंग बिरंगी कागज लगाया जाता है और दशहरे वाले दिन मैदान लंकेश के साथ मेघनाद और कुम्भकरण का पुतला लोगों को अपनी तरफ आर्कषित करता है।

बताया कि उनका परिवार मोहर्रम पर ताजिया और दशहरे पर लंकेश का पुतला कई सालों से बना रहा है। दशहरे वाले दिन रावण, मेघनाद और कुम्भकरण का पुतला दहन होगा।

यह भी पढ़ें:-बरेली: दशहरा मेला में ‘बार-बालाओं का अश्लील डांस’, जमकर लुटाए जा रहे रुपए

संबंधित समाचार