स्मृति शेष : मंदिर आंदोलन से चरम पर आई सियासत, धरती पुत्र के नाम से बनी पहचान, मुलायम का किसानों से था अगाध लगाव

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

विनोद श्रीवास्तव (मुरादाबाद), अमृत विचार। सियासत जिनके लिए कर्मभूमि से अधिक समाजवाद की पहचान बनी उस नेताजी के 10 अक्टूबर को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में आखिरी सांस लेने से राजनीति के एक नये युग का अंत होना स्वाभाविक है। धरती पुत्र, माटी के सपूत और न जाने कई पर्याय उनके नाम के आगे जुड़ते …

विनोद श्रीवास्तव (मुरादाबाद), अमृत विचार। सियासत जिनके लिए कर्मभूमि से अधिक समाजवाद की पहचान बनी उस नेताजी के 10 अक्टूबर को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में आखिरी सांस लेने से राजनीति के एक नये युग का अंत होना स्वाभाविक है। धरती पुत्र, माटी के सपूत और न जाने कई पर्याय उनके नाम के आगे जुड़ते रहे और राजनीति के दांव पेच में वह सिद्धहस्त होते रहे।

मुलायम सिंह यादव यूथ बिग्रेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद और रामपुर जिले के प्रभारी सिद्धार्थ सिंह कहते हैं कि मुलायम सिंह यादव 1967 से 1996 तक आठ बार उत्तर प्रदेश की विधानसभा के लिए चुने गए। 1982 से 87 तक विधान परिषद के सदस्य भी रहे। 1996 में लोकसभा के सांसद बने। तब से लेकर सात बार वह लोकसभा में सांसद रहे। 1977 में वह पहली बार यूपी में मंत्री और पहली बार 1989 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

तीन बार इस पद को सुशोभित करने वाले नेताजी एचडी देवगौड़ा सरकार में रक्षा मंत्री भी रहे। वह अपने खांटी अंदाज के लिए जाने जाते थे। हिंदू-मुस्लिम, कमजोर, पिछड़े, उपेक्षितों की आवाज मुलायम सिंह थे। उनका किसानों से अगाध लगाव था। वह कहते हैं कि उनको राजनीति का कहकरा दादाजी ने सिखाया लेकिन, पहचान नेताजी ने दिलाई। मुख्य विंग से लेकर अब उनके ही नाम के प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना उनके और अखिलेश यादव से ही संभव है। वह नौजवानों के प्रणेता रहे। वह कहते थे कि सपा को कभी बूढ़ा नहीं होने देना है, यह युवा युग का साफ संदेश था।

गंगा जमुनी तहजीब की नजीर थे नेताजी, सियासत के एक युग का अंत
मुरादाबाद के सांसद डॉ.एसटी हसन उनके निधन से काफी मर्माहत हैं। वह कहते हैं कि नेताजी के निधन से सियासत के एक युग का अंत हो गया। वह गंगा जमुनी-तहजीब की नजीर थे। उनकी एक आवाज पर पार्टी कार्यकर्ता मर मिटने को तैयार रहते थे। नेताजी समाजवाद के सच्चे सिपाही थे। वह बताते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके लिए प्रचार करने वह आए थे। जामा मस्जिद पार्क में सभा हुई। उनकी आवाज को अवाम ने समर्थन दिया लेकिन, कुछ कसर रह जाने से पार्टी को यह सीट नहीं मिली। उनके हुंकार की देन थी कि दोबारा जब मैं 2019 में सांसद चुनाव के लिए पार्टी के सिपाही के रूप में उतरा तो जनता ने जीत का उपहार दिया। यह उनके समाजवादी सिद्धांत और धरतीपुत्र की पहचान की ही देन थी।

सांसद डॉ.हसन बताते हैं कि नेताजी ने मुसलमानों के भीतर यह भरोसा पैदा किया कि देश में वह भी बराबर के हकदार हैं और सबका सम्मान है। विपरीत लहरों से जूझकर पार उतरने के उनके अंदाज की देन थी कि वह प्रदेश ही नहीं पूरे देश की सियासत की धुरी रहे। वह सभी को साथ लेकर चलते के लिए ही जाने जाते रहे। डॉ.राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण और खुद मुलायम सिंह यादव समाजवाद के प्रमुख स्तंभ रहे। उनके निधन ने देश की राजनीति में एक शून्यता की स्थिति ला दी है इसकी आसानी से भरपाई संभव नहीं। उनके सिद्धांत और आदर्श पर चलना ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

2007 तक कई बार मुरादाबाद आए मुलायम
पार्टी के निवर्तमान अध्यक्ष डीपी यादव सपा संरक्षक के निधन से काफी व्यथित हैं। वह कहते हैं कि वह सबके हमदर्द थे। उनका निधन एक युग का अंत और सच्चे अभिभावक का जाना है। उनके स्थान की भरपाई कतई संभव नहीं है। वह कार्यकर्ताओं के असली संरक्षक थे। सच्चाई के खिलाफ लड़ाई में वह चट्टान बनकर डिग जाते थे। प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीति करने के बाद भी वह सबके लिए सहज रहे। वह आखिरी बार 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान डॉ.एसटी हसन के लिए प्रचार करने आए थे। हालांकि, 1985 से 2007 तक वह कई बार यहां आते रहे।

ये भी पढ़ें : स्मृति शेष : एक रोशन दिमाग था न रहा, शहर में इक चराग…

संबंधित समाचार