श्री रामकथा : अंतर्विरोध के बावजूद सनातन धर्म का कोई विकल्प नहीं है
अमृत विचार, हरदोई। सनातन समाज में विरोध की परंपरा बहुकाल से चली आ रही है, लेकिन सनातन ही सत्य है और सत्य ही सनातन है। इस तथ्य और इस धर्माचरण की पद्धति का कोई विकल्प नहीं है। द कैम्ब्रिज स्कूल के प्रांगण में शनिवार से शुरू हुई सप्तदिवसीय श्री राम कथा का प्रारंभ करते हुए …
अमृत विचार, हरदोई। सनातन समाज में विरोध की परंपरा बहुकाल से चली आ रही है, लेकिन सनातन ही सत्य है और सत्य ही सनातन है। इस तथ्य और इस धर्माचरण की पद्धति का कोई विकल्प नहीं है। द कैम्ब्रिज स्कूल के प्रांगण में शनिवार से शुरू हुई सप्तदिवसीय श्री राम कथा का प्रारंभ करते हुए व्यासपीठ से प्रेममूर्ति प्रेम भूषण महाराज ने उक्त बातें कही।
लगभग सौ देशों के रामभक्तो से जुड़े ने कहा – कुछ लोगो ने मुझ से सवाल किया कि दुनिया के अन्य धर्मो में एक भगवान और एक ग्रंथ है, लेकिन हमारे यहां देवी देवता और सदग्रंथो की संख्या अधिक है। ऐसे में हम किसे माने और किसकी पूजा अर्चना करे? उत्तर देते हुए कथावाचक ने कहा की सनातन धर्म दुनिया का पुरातन और विशालतम धर्म हैं। जहाँ बड़ा परिवार होता हैं।
वहाँ अनेक विकल्प होते है हमारे हर प्रदेश में पूजनीय नदियाँ माँ गंगे , यमुना , कृष्णा ,कावेरी , सरस्वती, अलकनन्दा व्यास आदि सभी पूजनीय है। और सभी मानव का कल्याण करती है। कक्षा दस में हर विषय की पुस्तकें कम होती है । लेकिन जब हम ऊंची कक्षा में जाते है। तो पुस्तकों की संख्या भी बढ़ जाती है सनातन धर्म की व्यापकता ही इसकी विषेशता है।
प्रथम दिन पूज्य श्री ने श्री रामकथा महिमा का वर्णन करने के साथ ही साथ भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के विवाह के प्रसंग का गायन किया। कथा के क्रम में पूज्य महाराज जी ने कई भजनों का भी गायन किया जिसे सुनकर श्रोतागण झूमने लगे। कथा की मुख्य यजमान राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने पंचदीप जलाकर कथा आयोजन का शुभारंभ किया।
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