रामपुर: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की छत पर रामपुर के छात्रों ने चढ़ा दिया था ऊंट

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रामपुर, अमृत विचार। करीब 40 के दशक में रामपुर के छात्रों ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की छत पर ऊंट चढ़ा दिया था। छत से ऊंट को उतारने में यूनिवर्सिटी प्रशासन को पसीने छूट गए थे, फिर भी ऊंट नहीं उतर पाया था। ऊंट को छत पर चढ़ाने वालों के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इनाम घोषित …

रामपुर, अमृत विचार। करीब 40 के दशक में रामपुर के छात्रों ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की छत पर ऊंट चढ़ा दिया था। छत से ऊंट को उतारने में यूनिवर्सिटी प्रशासन को पसीने छूट गए थे, फिर भी ऊंट नहीं उतर पाया था। ऊंट को छत पर चढ़ाने वालों के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इनाम घोषित किया, तब रामपुर के हिमायत उल्लाह खां और उनकी टीम का नाम सामने आया था। अमुवि की छत पर ऊंट चढ़ाने की चर्चा छात्रों में आज भी होती है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी में वायसराय को लाने का मामला भी चर्चा में रहता है।

  • अब भी विश्वविद्यालय के छात्रों में बेहद चर्चा का बिषय बना रहता है ऊंट प्रकरण
  • रामपुर के छात्रों के अमुवि में ऐसे-ऐसे किस्से हैं जो वहां के इतिहास में हुए दर्ज

सर सैयद डे पर तमाम भूली बिसरी यादों की चर्चा हुई। डॉ. शुऐब खुर्शीद खां बताते हैं कि वह वर्ष 1970 से 78 तक यूनिवर्सिटी में तालिबे इल्म रहे। उनकी और उनके प्रिंसिपल के बीच कभी नहीं बनी वह उन्हें कालेज से निकलवाना चाहते थे जबकि, वह प्रिंसिपल को नौकरी से बर्खास्त कराने के मंसूबे तैयार करते थे। उन्होंने बताया कि वह अजमल खां तिब्बिया कालेज के छात्र संघ के सेक्रेट्री भी थे, इसलिए वीसी प्रोफेसर अली अहमद खुसरू से अच्छी पहचान थी और अपनी बात वीसी को बता देते थे।

डॉ. शुऐब ने बताया कि वीसी का तकिया कलाम ‘आपकी बात बिल्कुल सही है’था। वह उनके साथ प्ले माउथ में बैठकर खूब घूमते थे। उन्होंने बताया कि हिमायत उल्लाह खां का यूनिवर्सिटी की छत पर ऊंट चढ़ाने का किस्सा उन्होंने भी सुना। उन्होंने एक किस्सा और सुनाया कि यूनिवर्सिटी में मसूद टॉमी नाम का छात्र बहुत शैतान और हाजिर जवाब था। एक बार यूनिवर्सिटी में वायसराय का दौरा होना था। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह सोचते हुए कि मसूद कहीं कोई शैतानी न कर दे वायसराय के दौरे से पहले आठ दिन के लिए यूनिवर्सिटी बदर कर दिया।

लेकिन, मसूद दिल्ली पहुंच गए और वायसराय से मिले और बताय कि वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र हैं और आपकी अगवानी के लिए आए हैं। इसके बाद वह वायसराय के कूपे में बैठकर अलीगढ़ पहुंचे। रेलवे स्टेशन पर यूनिवर्सिटी का स्टॉफ वायसराय के इस्तकबाल के लिए खड़ा था। जैसे ही रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रुकी, ट्रेन के कूपे से सबसे मसूद को उतरता देख यूनिवर्सिटी प्रशासन के होश उड़ गए। इसके बाद मसूद ने वायसराय का यूनिवर्सिटी के स्टॉफ से परिचय कराया। यह किस्से कहानियां खूब प्रचलित हैं और जब भी अलीगीरियन एकत्रित होते हैं कुछ किस्से खुद ब खुद जुबां पर आ जाते हैं।

बोले अलीगीरियन
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में खाली समय में सीनियर स्टूडेंट किए गए कारनामों को खूब बयां किया जाता है। सीनियर्स की शैतानियों में लगाए गए दिमाग पर हर नया स्टूडेंट हैरतजदा रहता है। रामपुर के छात्रों द्वारा यूनिवर्सिटी की छत पर ऊंट चढ़ाने का किस्सा तो हमेशा ताजा रहता है। -अनुषा मलिक, शोधार्थी एएमयू

एएमयू में पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व का विकास भी किया जाता है। मसूद टॉमी द्वारा वायसराय को दिल्ली से लाना और उनके साथ कूपे में बैठकर अलीगढ़ तक आना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। यह किस्सा सुनकर मसूद टॉमी की हिम्मत और दिमाग की आज भी दाद दी जाती है।-इजहार मोहम्मद खां, छात्र स्नातक एएमयू

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने इस देश को राष्ट्रपति, राजनेता, डाक्टर, इंजीनियर, कारोबारी सब तरह के स्टूडेंट दिए हैं। सीनियर स्टूडेंट्स के किस्से हमेशा सुनाए जाते हैं और हमेशा सुनाए जाते रहेंगे। लेकिन, जिस तरह का किस्सा वायसराय को दिल्ली से अलीगढ़ तक लाने का है वह लाजवाब है। -डॉ. शुऐब खुर्शीद खां, पूर्व छात्र नेता एएमयू

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