अयोध्या: बेजुबानों के सामने पेट भरने की चुनौती, दुग्ध उत्पादन घटा
रुदौली, अयोध्या। बाढ़ की विभीषिका में बेजुबान पशुओं के सामने अब पेट भरने की चुनौती आ खड़ी हुई है। उनको चरने के लिए घास तक मयस्सर नहीं हो रही है। गांवों में पानी भरने के कारण घरों में रखा भूसा भीग कर खराब हो चुका है। पशुओं के खाने लायक नहीं बचा हैं। खेतों से …
रुदौली, अयोध्या। बाढ़ की विभीषिका में बेजुबान पशुओं के सामने अब पेट भरने की चुनौती आ खड़ी हुई है। उनको चरने के लिए घास तक मयस्सर नहीं हो रही है। गांवों में पानी भरने के कारण घरों में रखा भूसा भीग कर खराब हो चुका है। पशुओं के खाने लायक नहीं बचा हैं। खेतों से लेकर खलिहानों तक बाढ़ का पानी भरा होने से घास सड़ चुकी हैं। सरयू नदी की बाढ़ से मनुष्य के साथ ही पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। पशुओं को भरपेट चारा व पानी ही नहीं मिल सका। ऐसे में उनकी दूध देने की क्षमता घट गई। हालांकि प्रशासन की तरफ से भूसा वितरण किया गया है, जो ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।
कैथी मांझा, सराय नासिर, मुजैना, अब्बूपुर, कैथी, महंगू का पुरवा, सल्लाह पुर को इस बार की बाढ़ से पूरी तरह से तबाह कर दिया। सरकारी अभिलेखों के मुताबिक लगभग एक हजार से अधिक पशु भी तबाही के मंजर में फंसे हैं। यहां के पशुओं के सामने स्वच्छ जल व चारे का संकट पैदा हो गया। कैथी मांझा के पशुपालक श्रीदत्त, राम अचल बताते हैं कि गांव में सबसे ज्यादा समस्या पशुओं के निवाले की है। भूसा भीग गया और घास सड़ गई।
ननके, राम सजीवन का कहना है कि इस बार पशु दोहरी मार झेल रहे हैं। खरपतवार खाकर अपनी भूख मिटा रहे हैं। पहले सूरज की तपिश में हरी घास मुरझा गई और अब बची घास बाढ़ के पानी में सड़ गई। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र सराय नासिर में 160, अब्बूपुर में 75, कैथी में 238, कैथी मांझा में 342, सुलेम पुर में 22, सडरी में 512 व महंगू पुरवा में 232 पशु है। इनमें से आधे पशुओं का ही अब तक टीकाकरण हो पाया है।
चार की जगह दो ही लीटर दे रही दूध
चारे का संकट पैदा होने के कारण दुग्ध उत्पादन पर असर पड़ना भी लाजिमी है। पशुओं को भरपेट चारा व पानी ही नहीं मिल सका। ऐसे में उनकी दूध देने की क्षमता घट गई। तराई इलाके में बड़े पैमाने पर पशुपालन का कारोबार होता है। यहां का अयोध्या सहित बाराबंकी व राजधानी की मंडियों तक पहुंचता है। पशुपालक शिव कुमार, बलराम, दद्दन बताते हैं कि चार लीटर दूध देने वाली भैंस इस समय बमुश्किल दो लीटर दूध दे रही है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में भूसा लगातार वितरण कराया जा रहा है। तहसील प्रशासन बाढ़ प्रभावितों की हर संभव मदद कर रहा हैं…प्रज्ञा सिंह, तहसीलदार।
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